नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश संदीप मेहता ने राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा पर एक तीखा हमला बोलते हुए प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत को चौथा पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने शर्मा पर आंतरिक न्यायिक जांच में हस्तक्षेप करने, गोपनीयता का उल्लंघन करने और प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है।
न्यायमूर्ति मेहता ने इससे पहले क्रमश: 2, 10 और 17 अगस्त को पत्र लिखकर राजस्थान उच्च न्यायालय के तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश शर्मा पर ‘कुप्रशासन’, ‘कदाचार’, ‘भाई-भतीजावाद’ और ‘पक्षपात’ के आरोप लगाए थे।
न्यायमूर्ति शर्मा उनकी अदालत के बाहर कुछ वकीलों द्वारा विरोध प्रदर्शन किये जाने के बाद अवकाश पर चले गए। उन्होंने अपने ऊपर पर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने 26 अगस्त को कहा था कि न्यायमूर्ति मेहता द्वारा न्यायमूर्ति शर्मा पर लगाए गए आरोपों पर सार्वजनिक रूप से फैसला नहीं किया जा सकता और किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले न्यायाधीश को ‘‘अपना पक्ष रखने का उचित मौका’’ दिया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति मेहता ने 30 अगस्त को लिखे अपने चौथे पत्र में दावा किया कि उनके पास न्यायमूर्ति शर्मा के मनमाने, संदिग्ध और स्पष्ट तौर पर मनमाने कृत्यों के बारे में अतिरिक्त जानकारी’ और ‘सबूत’ हैं। न्यायमूर्ति मेहता स्वयं मूल रूप से राजस्थान उच्च न्यायालय से आते हैं।
न्यायमूर्ति मेहता ने राजस्थान उच्च न्यायालय में मनमाने ढंग से नियम बदलने, भूमि विवाद में न्यायिक हस्तक्षेप करने और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार व प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया है।
न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए उच्च न्यायालय की एक शिकायत समिति बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि आरोप है कि उक्त न्यायिक अधिकारी ने अपने मोबाइल फोन पर एक महिला सहकर्मी की अश्लील तस्वीरें दिखाई थीं।
न्यायमूर्ति मेहता ने पत्र में लिखा, ‘‘समिति के 21 मई, 2026 और 9 जुलाई, 2026 के दो प्रस्तावों में स्पष्ट तौर पर दर्ज है कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (न्यायमूर्ति शर्मा) ने जांच की कार्यवाही में सीधे तौर पर हस्तक्षेप किया, जिससे समिति की स्वतंत्रता बाधित हुई। ऐसे हस्तक्षेप से पूरी जांच प्रभावित हो सकती है और ऐसी संवेदनशील कार्यवाही की गोपनीयता भंग हुई है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान उच्च न्यायालय की तीन महिला न्यायाधीश वाली समिति ने कार्यवाही का विवरण तो दर्ज किया, लेकिन जांच को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति मेहता ने दावा किया, ‘‘समिति ने यह भी पाया कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने समिति के रिकॉर्ड रजिस्ट्री के अन्य अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों के साथ साझा किए, जिससे गंभीर आरोपों वाले एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ शुरू की गई जांच की गोपनीयता भंग हुई।’’
उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम ने 31 अगस्त को न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल को राजस्थान उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की थी।
न्यायमूर्ति मेहता ने सीजेआई को लिखे अपने तीन पत्रों में न्यायमूर्ति शर्मा पर सनसनीखेज आरोप लगाए थे और उनसे राज्य के बाहर से किसी स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने का आग्रह किया था।
न्यायमूर्ति मेहता को मई 2011 में राजस्थान उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। वह फरवरी 2023 में गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने और उसी साल नवंबर में पदोन्नत होकर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त हुए।
न्यायमूर्ति शर्मा को नवंबर 2016 में राजस्थान उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और जनवरी 2022 में उनका तबादला पटना उच्च न्यायालय कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति शर्मा ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राजस्थान वापस भेजने का अनुरोध किया, जिसे मार्च 2023 में उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम ने अस्वीकार कर दिया।
न्यायमूर्ति शर्मा को राजस्थान भेजने के बजाय उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय कर दिया गया। बाद में, कॉलेजियम ने मई 2025 में उन्हें राजस्थान वापस भेजने की सिफारिश की।
भाषा धीरज दिलीप
दिलीप