नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) फिल्म निर्माता करण जौहर ने बताया कि उनके दिवंगत पिता और निर्माता यश जौहर ने एक बार उन्हें घुड़सवारी सीखने और अभिनेता बनने की सलाह दी थी लेकिन उनकी मां हीरू जौहर ने तुरंत इस सुझाव को खारिज कर दिया था।
करण जौहर ने अपने पिता के जन्मदिन पर रविवार को भावुक संदेश साझा किया और याद किया कि उनके पिता हमेशा उनका हौसला बढ़ाते थे।
करण जौहर ने उस किस्से को याद किया, जब वह अपनी पहली डिजाइनर जैकेट, बरबेरी कोट, घर लेकर आए थे।
उन्होंने बताया कि उनके पिता उसे देखकर हैरान रह गए और पूछा कि यह क्या है।
करण जौहर ने बताया, “मैं बहुत गर्व के साथ ऐसा महसूस कर रहा था, जैसे मैंने पूरी बॉण्ड स्ट्रीट जीत ली हो। मैंने कहा, ‘पापा, यह बरबेरी है!’ उन्होंने पंजाबी अंदाज में गहरी सांस ली और कहा, ‘बेटा, यह बरबेरी नहीं... बहुत बुरी है।’ मैं टूट गया और फिर तुरंत हंसने लगा। यही मेरे पिता थे जमीन से जुड़े हुए, सरल और बेहद मजाकिया।”
उन्होंने ‘इंस्टाग्राम’ पर लिखा, “वह मेरे सबसे बड़े प्रशंसक भी थे। कई मौकों पर वह कहते थे, ‘तू इतना हैंडसम है, हीरो बन जा! घुड़सवारी क्यों नहीं सीखता।”
करण जौहर ने बताया कि जब भी उनके पिता उनकी तारीफों के पुल बांधते थे, उनकी मां हीरू जौहर उन्हें वास्तविकता से परिचित कराने के लिए मौजूद रहती थीं।
करण जौहर ने कहा, “क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि मैं जुहू बीच पर घुड़सवारी कर रहा हूं? या फिर बड़ी फिल्मों का अभिनेता बन रहा हूं? मेरे पिता की इन अति उत्साही ‘राजा बेटा’ वाली कल्पनाओं के बाद मेरी मां हमेशा मुझे अलग ले जाकर हकीकत से रूबरू कराती थीं। वह कहती थीं, ‘बेटा, तुम कैमरे के सामने नहीं आ सकते और निश्चित रूप से घोड़े पर तो बिल्कुल नहीं बैठ सकते।”
करण जौहर (54) ने इसके बाद दिवंगत निर्माता पिता को उनके संस्कारों और दयालु स्वभाव के लिए याद किया।
उन्होंने कहा, “मेरे पिता मेरे हीरो थे। उनके मूल्य, उनकी दयालुता, उनकी बेजोड़ विनम्रता और निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करने की उनकी क्षमता ऐसी थी कि कई बार यह मानवीय सीमा से परे लगती थी।”
यश जौहर का 74 वर्ष की उम्र में मुंबई में 2004 में निधन हो गया था।
वह उस समय कैंसर से जूझ रहे थे और सीने के गंभीर संक्रमण के कारण उनका निधन हुआ था।
भाषा जितेंद्र माधव
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