नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के दक्षिण परिसर के पास पेइंग गेस्ट (पीजी) के तौर पर इस्तेमाल हो रही बहुमंजिला इमारत ढहने की घटना के बाद सोमवार को छात्र संगठनों ने जवाबदेही तय करने की मांग तेज कर दी।
इन छात्र संगठनों ने निर्माण कार्यों से जुड़ी सुरक्षा, नियमों की निगरानी और बचाव अभियान में लापरवाही का आरोप लगाया।
वामपंथी संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने सत्य निकेतन में धरना दिया, जहां रविवार को इमारत ढह गई थी और कई छात्र उसमें फंस गए थे।
संगठन ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह के इस्तीफे की मांग की तथा आरोप लगाया कि वे छात्रों के लिए सुरक्षित एवं सस्ती आवास व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रहे हैं।
एक बयान में आइसा ने आरोप लगाया कि “हॉस्टल डेज” की इमारत पुरानी और कमजोर हो चुकी थी, फिर भी उसके नीचे दूसरा भूमिगत तल बनाने की अनुमति दे दी गई।
इसी मांग को दोहराते हुए कांग्रेस के छात्र संगठन ‘नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया’ (एनएसयूआई) के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने आरोप लगाया कि पिछले 10 साल में दिल्ली विश्वविद्यालय के लिए एक भी छात्रावास नहीं बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि छात्र निजी पीजी में रहने को मजबूर हैं, जहां “सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जाता।”
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने मांग की कि दिल्ली विश्वविद्यालय के अंदर छात्रों के लिए छात्रावास बनाए जाने चाहिए और अवैध रूप से संचालित छात्रावासों और पीजी को बंद किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘छात्रावासों और पीजी के लिए किराया नियंत्रण कानून बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को हादसे की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सभी पीजी की जांच की जानी चाहिए और उचित नियम एवं कानून बनाए जाने चाहिए।”
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ (एबीवीपी) ने भी इस घटना के बाद छात्रों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे अधिकारियों के सामने उठाए हैं।
एबीवीपी-दिल्ली ने रविवार को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की इमारत के बाहर बड़ा प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने गेट तोड़ दिया और एमसीडी परिसर के अंदर धरने पर बैठ गये।
संगठन ने सत्य निकेतन घटना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच, लापरवाही के लिए जिम्मेदार पीजी संचालकों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तथा छात्रों के आवास वाले इलाकों में सभी पीजी एवं किराये के मकानों की तुरंत जांच कराने की मांग की।
एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने इस घटना को “बेहद दुखद और चिंताजनक” बताया।
उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, प्रभावित छात्रों को न्याय और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने के लिए एमसीडी आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।
एबीवीपी-दिल्ली ने सोमवार को अपने आईटीओ कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में छात्र सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे उठाए।
इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि दूसरे दिन भी बचाव अभियान जारी रहा।
भाषा जोहेब सुरेश
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