जयपुर, सात सितंबर (भाषा) राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने सोमवार को कहा कि विश्वविद्यालयों को छात्रों में जागरुकता, बौद्धिक क्षमता और समझ विकसित करने के लिए केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित शिक्षा नहीं देनी चाहिए, बल्कि उन्हें जीवन से जुड़ी शिक्षा भी प्रदान करनी चाहिए।
जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए बागडे ने कहा कि छात्रों को ऐसी शिक्षा दी जानी चाहिए, जिससे उनमें सही और गलत के बीच अंतर करने की क्षमता विकसित हो सके।
उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा का अधिक से अधिक उपयोग होने पर उसका तेजी से विकास होगा और इसे आम लोगों के बीच इस्तेमाल की जाने वाली भाषा बनाने की जरूरत है।
राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है और परंपरागत रूप से इसका प्रसार मौखिक रूप से किया जाता रहा है।
उन्होंने भारत की ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान को नष्ट नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि नालंदा जैसे संस्थानों के पुस्तकालयों को जलाए जाने के बावजूद ज्ञान की परंपरा समाप्त नहीं हुई।
बागडे ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत के योगदान का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि देश की ज्ञान परंपरा के कई पहलुओं को बाद में पश्चिमी उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया गया।
सामाजिक सुधारक रामानंदाचार्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने उनके संदेश ‘‘जात पात पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई’’ को याद किया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का मूल्यांकन जाति के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि संतों और आध्यात्मिक नेताओं ने हमेशा समाज के कल्याण के लिए काम किया है। उन्होंने संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए प्रेरणा देने वाले नारायणदासजी महाराज को दूरदर्शी बताते हुए कहा कि उन्होंने ज्ञान के संरक्षण और प्रसार के महत्व को पहले ही समझ लिया था।
इस समारोह में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेडी ने दीक्षांत भाषण दिया।
इस अवसर पर बागडे ने विश्वविद्यालय की पहल पर स्थापित राजस्थान मंत्र प्रतिष्ठान की वेबसाइट का शुभारंभ किया और ब्रह्मर्षि गुरुवानंद स्वामी तथा प्रो. रमेश कुमार पांडेय को मानद विद्यावाचस्पति उपाधि प्रदान की।
उन्होंने मेधावी छात्रों को पीएचडी की उपाधियां, स्वर्ण पदक और अन्य डिग्रियां भी प्रदान कीं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मदन मोहन झा ने संस्थान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
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पृथ्वी रवि कांत