नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को गाजियाबाद पुलिस से कहा कि वह यह बताए कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को उजागर करने वाले एक पत्रकार के खिलाफ ‘रोडरेज’ के मामले के संबंध में वह सोशल मीडिया मंच 'एक्स' से किस तरह की जानकारी मांग रही है।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि जानकारी उपलब्ध कराए जाने के बाद अगले आदेश तक उसे सार्वजनिक किया जाएगा।
पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने ‘रोडरेज’ मामले में उनके खिलाफ गाजियाबाद पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज किये जाने को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की है। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि आरोपी के निजता के अधिकार और किसी मामले की गहन जांच करने के लिए पीड़ित तथा जांच एजेंसी के अधिकारों के बीच संतुलन बनाया जाना चाहिए।
पीठ ने पुलिस के वकील से सवाल किया, ‘‘किसी ‘रोडरेज’ मामले में आपको आरोपी का डिजिटल फुटप्रिंट क्यों चाहिए?’’
पीठ ने आदेश दिया, ‘‘ (गाजियाबाद पुलिस) हलफनामा दाखिल करके स्पष्ट कर सकती है कि जांच के उद्देश्य से ‘एक्स’ से किस तरह की जानकारी उपलब्ध कराना अपेक्षित है।’’ पीठ ने यह भी कहा कि उपाध्याय जांच में सहयोग करेंगे।
उपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि आरोपी के सोशल मीडिया संबंधी डेटा तक पुलिस की पहुंच को लेकर दिशानिर्देश बनाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मौजूदा मामले में पुलिस अब सोशल मीडिया संबंधी जानकारी और आईएमईआई नंबर आदि का विवरण मांग रही है।
अदालत द्वारा पुलिस से जानकारी मांगने का कारण बताने को कहे जाने पर एजेंसी के वकील ने पीठ से राम मंदिर के निर्माण से जुड़े एक इंजीनियर के खिलाफ उपाध्याय द्वारा लगाए गए ‘‘व्यापक’’ आरोपों पर गौर करने का आग्रह किया।
वकील ने सवाल किया, ‘‘वह पुलिस के नियमन की बात कर रहे हैं। इस तरह की पत्रकारिता के नियमन का क्या?’’
उन्होंने कहा कि ‘रोडरेज’ मामले में एक प्रत्यक्षदर्शी का बयान भी है, जो फिलहाल जांच के चरण में है। उन्होंने कहा कि यदि अंततः पत्रकार के खिलाफ कुछ नहीं पाया जाता है, तो मामला बंद कर दिया जाएगा।
गत 25 अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में उपाध्याय को किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया था और गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में दर्ज प्राथमिकी की प्रति उन्हें उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्हें प्राथमिकी की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई है और पुलिस आसपास के दुकानदारों पर संबंधित समय के सीसीटीवी फुटेज हटाने के लिए दबाव बना रही है।
उपाध्याय ने प्राथमिकी रद्द करने या वैकल्पिक रूप से जांच उत्तर प्रदेश पुलिस से लेकर किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने का अनुरोध किया है। उन्होंने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित उनकी रिपोर्टिंग के कारण उनके खिलाफ यह प्राथमिकी दर्ज की गई है।
भाषा अमित दिलीप
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