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असम में मातृ मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से कम, देश का स्वास्थ्य क्षेत्र बेहतर हुआ: उपराष्ट्रपति

(तस्वीरों के साथ)

गुवाहाटी, छह सितंबर (भाषा) उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को कहा कि असम में मातृ मृत्यु दर अब राष्ट्रीय औसत से कम है और राज्य की यह उपलब्धि ‘‘मील का पत्थर’’ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बेहतरीन नेतृत्व की वजह से पिछले दशक में स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत का प्रदर्शन ‘‘शानदार’’ रहा है।

यहां ‘श्रीमंत शंकरदेव यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज’ (एसएसयूएचएस) के दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब लोग इलाज के लिए इस राज्य में आएंगे।

राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की वजह से भारत में स्वास्थ्य विज्ञान क्षेत्र के लिहाज से पिछला दशक शानदार रहा।’’

उन्होंने कहा कि एक बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की गई थी और अभी 44 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत कार्डधारक हैं।

राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी के दौरान भारत एकमात्र ऐसा देश था जिसने मुफ्त में टीका प्रदान किया। इसने न केवल अपने 140 करोड़ लोगों को टीका लगवाया, बल्कि 100 से अधिक देशों को भी मुफ्त में टीके प्रदान किए। इसी वजह से लोगों की प्रतिरक्षा बरकरार रही।’’

असम में स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति पर उन्होंने कहा कि पहली बार राज्य में मातृ मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से नीचे आ गई है जो एक ‘‘मील का पत्थर’’ है।

कैंसर के इलाज के लिए गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में जल्द ही शुरू होने वाली ‘प्रोटॉन बीम थेरेपी यूनिट’ का जिक्र करते हुए राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘असम में वह दिन आएगा जब लोग इलाज के लिए राज्य में आएंगे।’’

उपराष्ट्रपति ने मेडिकल छात्रों और पढ़ाई पूरी कर रहे युवाओं को सोशल मीडिया पर अधिक समय न बिताने तथा नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहने की सलाह भी दी।

उन्होंने लोगों को मादक पदार्थों का सेवन न करने का संकल्प दिलाया।

उन्होंने स्थानीय भाषाओं में मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने की कोशिशों की तारीफ की, जिसमें चिकित्सा विज्ञान का एंग्लो-असमिया शब्दकोश और असमिया भाषा में चिकित्सा विज्ञान की किताबें प्रकाशित करना शामिल है।

असम में स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में हुई तरक्की का जिक्र करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि राज्य में चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या 2021 में सात से बढ़कर 15 हो चुकी है, जो दोगुना से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि राज्य में अभी नौ और चिकित्सा महाविद्यालय अभी बन रहे हैं।

भाषा संतोष नरेश

नरेश