(शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, छह सितंबर (भाषा) नेपाल में 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ से मची तबाही के करीब 11 दिन बाद भी बचावकर्मी मलबे में लोगों की तलाश कर रहे हैं लेकिन उन्हें बरामद किए जा रहे शवों की पहचान करने में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल पुलिस द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, 1,344 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि 589 विदेशियों सहित करीब पांच हजार लोग अब भी लापता हैं। अब तक 13,400 से अधिक लोगों को बचाया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा के नजदीक 26 अगस्त को ग्लेशियर से हिमखंड का बड़ा हिस्सा टूटा और इसके बाद भारी मलबे और वेग के साथ निचले इलाकों में पानी बहा और उत्तरी व मध्य नेपाल में बस्तियां तबाह हो गईं।
चीनी मीडिया की खबरों के मुताबिक तिब्बत में भी कम से कम 43 लोगों की मौत हुई है जबकि 500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।
अधिकारियों के अनुसार, नेपाल में बरामद शवों में से कम से कम 85 बच्चों के थे जबकि लगभग 500 शवों के कुछ अंग गायब थे। कई शवों की हालत ऐसी है कि उनकी पहचान करने में मुश्किल आ रही है।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा व्यवस्थापन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के मुताबिक चितवन जिले से सबसे अधिक 362 शव बरामद किए गए। इसके बाद प्रभावित जिलों में नवलपरासी पूर्व, नवलपरासी पश्चिम, नुवाकोट, रसुवा, गोरखा, धादिंग और तनहुं शामिल हैं।
एनडीआरआरएमए के अनुसार, केवल 98 शवों की पहचान की गई और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया।
अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि पानी के साथ बहकर आए कई शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हैं, या फिर उनके केवल कुछ हिस्से ही मिल पाए हैं। पुलिस ने कहा है कि आपदा वाली जगहों से दूर बहकर गए शवों और पानी व कीचड़ में दबे शवों की पहचान करना बहुत मुश्किल हो गया है।
नेपाल पुलिस ने शवों और इंसानी अवशेषों की पहचान में मदद के लिए लापता लोगों के रिश्तेदारों से डीएनए नमूने एकत्र करने की प्रक्रिया शुरू की है। नेपाल में रहने वाले रिश्तेदार काठमांडू स्थित नेपाल पुलिस अस्पताल या अपने नजदीकी जिला पुलिस कार्यालय में जाकर नमूने दे सकते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में पहचान आसान बनाने के लिए डीएनए नमूने लेने के बाद 1,000 से अधिक अज्ञात शवों को दफनाया गया है।
अस्पतालों को पहचान न हो पाने वाले शवों की बढ़ती संख्या से निपटने में मुश्किल हो रही है। चिकित्सा केंद्रों पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो रही है जो अपने लापता रिश्तेदारों की तस्वीरें साथ लेकर आते हैं और दीवारों पर लगी मृतकों की तस्वीरों को ध्यान से देखकर अपने परिजनों से मिलान करने की कोशिश करते दिख रहे हैं।
नेपाल के सूचना और संचार मंत्री विक्रम तिमिलसिना ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि रासुवा में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री की कोई कमी न हो और उनके वितरण में कोई अव्यवस्था न हो।
तिमिलसिना ने सरकारी अखबार ‘गोरखापत्र’ के ऑनलाइन संस्करण को बताया कि आपदा के बड़े पैमाने के बावजूद सरकार राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल थी।
उन्होंने कहा कि अभी राहत सामग्री की कोई कमी नहीं है और सरकार संसाधनों के प्रबंधन में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने देगी। मंत्री ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के लिए विद्यालयों और अस्पतालों की इमारतों में अस्थायी रहने की व्यवस्था की गई है, जबकि उनके स्थायी पुनर्वास की योजना भी तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित इलाकों में ठप पड़े संचार, बिजली और सड़क नेटवर्क को बहाल करने के लिए मानवबल और संसाधनों को जुटा रही है।
तिमिलसिना ने कहा, ‘‘इस समय नेपाल जलवायु न्याय की मांग कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस बारे में गंभीर होना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि इस आपदा ने भविष्य में जलवायु से जुड़ी आपदाओं के लिए बेहतर तैयारी की जरूरत को उजागर किया है।
पिछले तीन दिनों में वैकल्पिक रास्तों से काठमांडू घाटी में लगभग 88,000 रसोई गैस सिलेंडर लाए गए हैं। अधिकारी पृथ्वी राजमार्ग के बाधित होने के बाद भी आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। यह राजमार्ग काठमांडू घाटी को नेपाल के बाकी हिस्सों और भारत से जोड़ने वाला मुख्य और अहम रास्ता है।
नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन के अनुसार, तीन सितंबर से छह सितंबर के बीच 18 कंपनियों द्वारा घाटी में 87,877 एलपीजी सिलेंडर लाए गए।
धदिंग के कृष्णाभिर में त्रिशूली नदी के कटाव से 30 अगस्त को सड़क क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे पृथ्वी राजमार्ग बाधित हो गया और ईंधन टैंकर व एलपीजी लाने वाले वाहन काठमांडू की ओर आगे नहीं बढ़ पाए।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल और उनके दक्षिण कोरियाई समकक्ष चो ह्यून ने रविवार को जारी खोज, बचाव और राहत कार्यों पर चर्चा की। खनाल के कार्यालय ने बताया कि काठमांडू में हुई बैठक में दोनों नेताओं ने लापता दक्षिण कोरियाई नागरिकों का पता लगाने के प्रयासों पर विस्तार से बातचीत की।
खनाल ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में अंतर-एजेंसी त्वरित प्रतिक्रिया टीम और कोरिया आपदा राहत टीम भेजने, साथ ही मानवीय सहायता और राहत सामग्री उपलब्ध कराने के लिए दक्षिण कोरियाई सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने मजबूत और टिकाऊ बुनियादी ढांचा बनाने की नेपाल की प्राथमिकता के बारे में भी बताया और दक्षिण कोरिया से लगातार समर्थन मिलने की उम्मीद जताई।
चो ने ‘‘आपदा के बाद पुनर्निर्माण के प्रयासों में नेपाल की मदद करने के लिए कोरियाई सरकार की इच्छा’’ जताई और नेपाल व दक्षिण कोरिया से जलवायु परिवर्तन के असर के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया, जिसमें सीओपी जैसे वैश्विक मंच भी शामिल हैं।
काठमांडू ने मित्र देशों से आग्रह किया है कि वे यात्रा संबंधी परामर्श को केवल बाढ़ से प्रभावित विशिष्ट क्षेत्रों तक ही सीमित रखें, साथ ही यह भी बताया है कि देश का बाकी हिस्सा यात्रा और पर्यटन के लिए खुला और सुरक्षित है।
यह अनुरोध तब आया है जब अमेरिका ने चार सितंबर को अपने नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श जारी कर प्राकृतिक आपदाओं के कारण पूरे नेपाल को ‘लेवल 2’ यानी “अधिक सावधानी बरतने” की श्रेणी में रखा।
इस बीच, रविवार तड़के गोरखा जिले में आई बाढ़ में चार मकान और एक झूला पुल बह गए, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ।
पुलिस ने बताया कि नम्रुंग खोला नदी के उफान पर आने के बाद चुमनुबरी ग्रामपालिका-4 में बाढ़ आ गई। बाढ़ देख निवासी सुरक्षित स्थानों पर चले गए, लेकिन चार मकान बह गए।
अधिकारियों के मुताबिक नदी के उद्गम स्थल के नजदीक बहाव में कीचड़ और मलबा आने से संभवत: बहाव बाधित हो गया होगा। नम्रुंग खोला नदी बूढ़ी गंडकी नदी में मिलती है, और बूढ़ी गंडकी के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने को कहा गया है।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, बाढ़ से नामरुंग इलाके में दो छोटी पनबिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। झूला पुल के बह जाने के कारण इलाके में आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
भाषा धीरज प्रशांत
प्रशांत