नयी दिल्ली, पांच सितंबर (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि बौद्धिक स्वतंत्रता मजबूत होने के साथ भारत आज “आत्मविश्वास से भरा और बेझिझक” है तथा अपनी विरासत के अध्ययन के लिए अब किसी और की अनुमति का इंतजार नहीं करता है।
यहां फाउंडेशन फॉर इंडियन हिस्टोरिकल एंड कल्चरल रिसर्च की ओर से आयोजित वार्षिक इतिहास पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “1991 में हमें आर्थिक स्वतंत्रता मिली थी, अब जाकर बौद्धिक स्वतंत्रता को मजबूती मिल रही है... बौद्धिक स्वतंत्रता से ही हमें खुद को जानने का अधिकार मिलेगा।”
उन्होंने सभी नजरियों वाले विचारकों को बहस में शामिल करने की वकालत की, ताकि अलग-अलग विचारों के बीच टकराव हो सके और जागरूक जनता खुद तथ्यों व प्रमाणों के आधार पर निष्कर्ष निकाल सके।
वित्त मंत्री ने कहा, “आज का भारत आत्मविश्वास से भरा है और इसे लेकर उसे कोई झिझक नहीं है; हमने अपनी विरासत का अध्ययन करने के लिए किसी और की मंजूरी का इंतजार करना भी छोड़ दिया है।”
उन्होंने कहा, “हम अपने शिलालेखों को फिर से पढ़ रहे हैं, समुद्री व्यापार को समझ रहे हैं, अपने गणित की ओर लौट रहे हैं और इन कहानियों को सच्ची खुशी और पूरी सटीकता के साथ सुना रहे हैं। मुझे लगता है कि उपनिवेश-मुक्ति का यही मतलब होना चाहिए। यह सिर्फ एक तय पाठ्यपुस्तक की जगह दूसरी पाठ्यपुस्तक लाने का मामला नहीं हो सकता।”
सीतारमण ने कहा, “इसका मतलब है एक बड़ा अभिलेख, ज्यादा भाषाएं, मुश्किल सवाल और विद्वानों का एक बहुत बड़ा दायरा, जिनके काम को असल में पढ़ा जाए। सबसे बड़ी बात यह है कि किसी भी संस्था को यह पहले से तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि कौन से सबूत देखे जा सकते हैं।”
इस अवसर पर वित्त मंत्री ने एसएल भैरप्पा स्मृति व्याख्यान भी दिया।
सीतारमण ने कहा कि भैरप्पा ने कभी अपने अनुयायियों की कोई सेना नहीं जुटाई; बल्कि उन्होंने इस बात को बेहतर बनाने की कोशिश की कि इंसान सच को किस नजरिए से देखते हैं।
उन्होंने कहा कि पांच सितंबर को हम अपने शिक्षकों और विचारकों के प्रति सबसे अच्छी कृतज्ञता यही व्यक्त कर सकते हैं कि भारत के बौद्धिक मंच के दोनों पक्षों को रोशन बनाए रखें।
एसएल भैरप्पा एक प्रसिद्ध उपन्यासकार, दार्शनिक और पटकथा लेखक थे, जिन्होंने कन्नड़ भाषा में लेखन किया। वर्ष 2025 में 94 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
भाषा प्रशांत शफीक
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