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चीन के साथ संबंधों को केवल सीमा विवाद के मुद्दे तक सीमित नहीं रखा जा सकता: पूर्व सीडीएस चौहान

नयी दिल्ली, पांच सितंबर (भाषा) चीन को भारत के लिए दीर्घकालिक और व्यापक चुनौती बताते हुए पूर्व प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) अनिल चौहान ने शनिवार को कहा कि पड़ोसी देश के साथ सीमा विवाद अब भी सुलझा नहीं है और यहां तक कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की स्थिति को लेकर भी पूरी तरह परस्पर सहमति नहीं है लेकिन ‘‘दोनों देशों के बीच संबंधों को केवल सीमा विवाद के मुद्दे तक सीमित नहीं रखा जा सकता’’।

यहां तीन मूर्ति भवन परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘भारत की सुरक्षा के लिए खतरे और चुनौतियां’ विषय पर व्याख्यान देते हुए उन्होंने कहा कि सीमा पर स्थिरता के लिए ‘‘सतर्कता, विश्वसनीय क्षमताएं, स्पष्ट समझौते और उनका लगातार पालन आवश्यक है’’।

चौहान की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत की थी। इस बातचीत में सीमा के निर्धारण और सीमा-पार सहयोग को जारी रखने पर ध्यान केंद्रित किया गया था।

जनरल (सेवानिवृत्त) चौहान ने अपने संबोधन में शनिवार के अखबार में प्रकाशित एक खबर का भी उल्लेख किया, जिसमें “हॉटलाइन स्थापित किए जाने” के साथ-साथ पूर्वोत्तर में कोर कमांडर स्तर की बातचीत की संभावना के बारे में बताया गया था। उन्होंने इसे “एक स्वागत योग्य कदम” बताया।

अपने संबोधन में उन्होंने भारत के सामने मौजूद कई चुनौतियों का उल्लेख किया और बताया कि भारत को उनसे किस तरह निपटना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक हमारे उत्तरी पड़ोसी देश (चीन) का सवाल है, वह बिल्कुल अलग और अधिक दीर्घकालिक तथा व्यापक चुनौती पेश करता है।’’

पूर्व सीडीएस ने कहा, ‘‘सीमा का मुद्दा अब भी सुलझा नहीं है और यहां तक कि एलएसी की कोई पारस्परिक रूप से सहमत परिभाषा भी नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि चीन और भारत एशिया की दो प्रमुख शक्तियां, बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और प्राचीन सभ्यताओं वाले देश हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को केवल सीमा विवाद के मुद्दे तक सीमित नहीं रखा जा सकता।

जनरल (सेवानिवृत्त) चौहान ने कहा कि क्योंकि दोनों देश एक-दूसरे के साथ सहयोग भी करते हैं और प्रतिस्पर्धा भी, तथा क्षेत्रीय और वैश्विक व्यवस्था को लेकर उनके विचार अलग-अलग हैं इसलिए चीन के साथ संवाद और संपर्क बनाए रखना आवश्यक है।

भाषा देवेंद्र शफीक

शफीक