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त्रिपुरा: आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादी संगठनों की हड़ताल के दूसरे दिन रेल, सड़क यातायात प्रभावित

अगरतला, पांच सितंबर (भाषा) त्रिपुरा में हथियार डाल चुके उग्रवादी संगठनों की ओर से त्रिपक्षीय शांति समझौते को लागू करने सहित 11 सूत्री मांगों को लेकर बुलाई गई 72 घंटे की हड़ताल के दूसरे दिन शनिवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में रेल सेवाएं और वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही।

विपक्षी दलों ने राज्य की भाजपा सरकार से आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादियों से बातचीत कर उनका विरोध-प्रदर्शन समाप्त कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का सबसे ज्यादा खामियाजा राज्य की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने ‘ऑल रिटर्नईज रिहैबिलिटेशन कमेटी’ के बैनर तले पश्चिम त्रिपुरा जिले के हतईकोतोर, ब्रिगुदासबारी और खोवाई चौमुहानी में सड़कें अवरुद्ध कर दीं।

प्रदर्शनकारी पश्चिम त्रिपुरा के ब्रिगुदासबारी में रेल की पटरियों पर बैठ गए, जिसके कारण पूर्वोत्तर सीमा रेलवे (एनएफआर) को लंबी दूरी की रेलगाड़ियों समेत कई रेलगाड़ियों को आंशिक रूप से और कुछ को पूरी तरह रद्द करने के साथ-साथ कई रेलगाड़ियों के समय में बदलाव की घोषणा करनी पड़ी।

पुलिस अधिकारी ने कहा, “हड़ताल के कारण रेल सेवाओं और वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है, लेकिन स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है।”

त्रिपुरा की जीवनरेखा माने जाने वाले असम-अगरतला राष्ट्रीय राजमार्ग पर हतईकोतोर में हड़ताल के कारण वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। इसके कारण पूर्वोत्तर का यह राज्य देश के बाकी हिस्सों से संपर्क में गंभीर रूप से प्रभावित हुआ।

हथियार डाल चुके सात उग्रवादी गुटों का प्रतिनिधित्व करने वाली ‘ऑल रिटर्नईज रिहैबिलिटेशन कमेटी’ ने 2024 में हस्ताक्षरित शांति समझौते को लागू करने की मांग को लेकर शुक्रवार को 72 घंटे की हड़ताल शुरू की थी। इस समझौते के तहत उग्रवादियों ने मुख्यमंत्री माणिक साहा के समक्ष हथियार डाले थे।

पश्चिम त्रिपुरा के जिलाधिकारी विशाल कुमार ने शुक्रवार को बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, “हमने शांति समझौते के विभिन्न बिंदुओं पर कमेटी के नेताओं के साथ हतईकोतोर में बातचीत की है। उन्होंने कुछ मांगें रखी हैं, जिन पर सरकार काम करने के लिए तैयार है। सरकार समयबद्ध तरीके से समझौते को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

उन्होंने कहा कि कमेटी के नेताओं ने बताया है कि वे सरकार के प्रस्तावों पर अपने कैडरों के साथ चर्चा करेंगे और जल्द से जल्द प्रशासन को इसकी जानकारी देंगे।

संगठन की 11 सूत्री मांगों में मूल निवासियों के लिए भूमि अधिकार सुनिश्चित करना और हथियार डाल चुके उग्रवादियों के खिलाफ लंबित सभी मामले वापस लेना शामिल हैं।

पूर्व विद्रोही नेता जीवनजॉय रियांग ने कहा, ‘‘हमने सरकार से हमारे पुनर्वास के लिए कोई समाधान निकालने की अपील की थी, अन्यथा आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादी अनिश्चितकालीन नाकेबंदी करेंगे। हम अपनी आजीविका से जुड़े मुद्दों को लेकर कोई समझौता नहीं करेंगे।’’

वाममोर्चा के संयोजक माणिक डे ने कहा कि सरकार को शांति समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादियों से किए गए वादों को पूरा करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार को नाकेबंदी खत्म करने के लिए आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादियों के साथ बातचीत करनी चाहिए।

कांग्रेस नेता सुदीप रॉय बर्मन ने भी शांति समझौते में किए गए वादों को पूरा करने की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे आंदोलनों का सबसे ज्यादा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।’’

भाषा

देवेंद्र पवनेश

पवनेश