(पायल बनर्जी)
नयी दिल्ली, पांच सितंबर (भाषा) सोशल मीडिया के चलते रूप-रंग को लेकर बढ़ती सजगता और कम उम्र में बाल झड़ने के बढ़ते मामलों के चलते युवाओं के पीछे जाती हेयरलाइन और बाल प्रतिरोपण के लिए परामर्श लेने का चलन बढ़ रहा है। त्वचा रोग विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी।
हालांकि, विशेषज्ञों ने आगाह किया कि अधिक स्पष्ट या ‘‘आदर्श’’ हेयरलाइन की चाहत का मतलब यह नहीं है कि कोई युवा बाल प्रतिरोपण के लिए उपयुक्त उम्मीदवार है। उन्होंने सर्जरी पर विचार करने से पहले बाल झड़ने के कारण और इसके संभावित बढ़ने की स्थिति का पता लगाने की जरूरत पर जोर दिया।
दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में त्वचा रोग विभाग प्रोफेसर डॉ. नीतू भारि ने कहा कि कम उम्र में बाल झड़ने को लेकर युवा अब बालों की हेयरलाइन में मामूली बदलावों के प्रति भी अधिक सजग हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका एक कारण सोशल मीडिया पर लगातार होने वाली तुलना भी है।
उन्होंने कहा, ‘‘कम उम्र में बाल झड़ने को पहले चिकित्सकीय समस्या के तौर पर देखा जाना चाहिए और बाद में सौंदर्य संबंधी चिंता के रूप में।’’
डॉ. भारि ने कहा कि प्राथमिकता बाल झड़ने के कारण का पता लगाने, यह आकलन करने की होनी चाहिए कि समस्या बढ़ रही है या नहीं और सही समय पर उचित उपचार शुरू करने की होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘कम उम्र के मरीज के लिए बाल प्रतिरोपण हमेशा पहला या सबसे अच्छा विकल्प नहीं होता। कई मामलों में शुरुआती निदान और चिकित्सकीय उपचार से मौजूदा बालों को बचाने में मदद मिल सकती है तथा सर्जरी की जरूरत को टाला या विलंबित किया जा सकता है। इसलिए युवाओं को केवल तस्वीरों या सोशल मीडिया पर अपनी हेयरलाइन कैसी दिखती है, इसके आधार पर फैसला लेने के बजाय त्वचा रोग विशेषज्ञ से उचित जांच करानी चाहिए।’’
दिल्ली स्थित डर्मालाइफ स्किन एंड हेयर क्लीनिक के वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ, बाल प्रतिरोपण सर्जन और चिकित्सा निदेशक डॉ. गौरव गर्ग ने कहा, ‘‘हम कम उम्र के मरीजों, जिनमें 20 वर्ष की शुरुआती उम्र वाले लोग भी शामिल हैं, की हेयरलाइन बहाली और बाल प्रतिरोपण के बारे में पूछताछ में स्पष्ट बढ़ोतरी देख रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने युवाओं के अपने रूप-रंग को देखने के तरीके को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि पहले पीछे जाती हेयरलाइन को सामान्य बदलाव के तौर पर स्वीकार किया जा सकता था, लेकिन अब उस पर ध्यान दिया जाता है और उसकी तुलना मशहूर हस्तियों तथा सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर से की जाती है।
उन्होंने कहा, ‘‘साथ ही, हम कम उम्र में बाल झड़ने के वास्तविक मामले भी देख रहे हैं। हालांकि, बाल प्रतिरोपण कराने की इच्छा का यह मतलब नहीं है कि युवा मरीज इसके लिए तैयार है। सबसे पहले बाल झड़ने के कारण, उसके स्वरूप और आगे इसके बढ़ने की संभावित स्थिति का आकलन किया जाना जरूरी है।’’
वर्ष 2025 में प्रकाशित एक भारतीय अध्ययन में शुरुआती उम्र में होने वाले एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया से पीड़ित 99 मरीजों को शामिल किया गया था। अध्ययन में 20-25 वर्ष की आयु वाले मरीजों की संख्या सबसे अधिक थी और प्रतिभागियों की औसत उम्र करीब 24.8 वर्ष थी। आधे से अधिक मरीजों ने इस समस्या का पारिवारिक इतिहास भी बताया।
डॉ. गर्ग ने कहा, ‘‘सामान्य सिद्धांत के तौर पर हम 25 वर्ष की उम्र से पहले बाल प्रतिरोपण की सलाह देने में काफी सतर्क रहते हैं, क्योंकि तब तक बाल झड़ने का स्वरूप विकसित हो रहा हो सकता है। एक बार यह स्वरूप स्थिर हो जाए तो परिणाम अधिक अनुमानित होते हैं और मरीज की दीर्घकालिक जरूरतों के अनुसार हेयरलाइन की योजना बनाई जा सकती है। इसलिए कम उम्र के मरीजों में सर्जरी पर विचार करने से पहले निदान, निगरानी और उचित गैर-सर्जिकल उपचार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।’’
मेदांता अस्पताल के त्वचा रोग विभाग के निदेशक डॉ. रमनजीत सिंह ने कहा कि युवाओं में बाल झड़ने की समस्या के लिए तत्काल सौंदर्य संबंधी समाधान तलाशने के बजाय त्वचा रोग विशेषज्ञ से उचित जांच कराना जरूरी है।
भाषा अमित रंजन
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