नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर में सर्दी के मौसम के दौरान वायु प्रदूषण को कम करने के लिए हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं की केवल संख्या दर्ज करने के बजाय अब उनकी तीव्रता का आकलन करना शुरू कर दिया है।
सीएक्यूएम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि वह अब पराली जलाने से प्रभावित जमीन के क्षेत्रफल को मापने पर भी ध्यान दे रही है और इसके लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया तैयार की जा रही है।
ये कदम हाल में पराली जलाए जाने से संबंधित कई रिपोर्टों और अध्ययनों के बाद उठाए गए हैं।
सीएक्यूएम के अधिकारी ने कहा, “यह देखते हुए कि आग की घटनाओं की संख्या को ध्यान में रखना एक सीमित तरीका साबित हुआ है, जले हुए क्षेत्र का आकलन करने की जरूरत है। हम इसके लिए एक प्रक्रिया तैयार कर रहे हैं।”
अधिकारी ने कहा कि पराली जलाने की तीव्रता का आकलन करने से आग के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी।
भाषा जोहेब रंजन
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