अयोध्या (उप्र), चार सितंबर (भाषा) अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट राम मंदिर में हाल में हुई चोरी जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अपनी निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत करेगा। ट्रस्ट के नवनियुक्त महासचिव गोविंद देव गिरि ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए ट्रस्ट के पहले सीईओ की नियुक्ति का समर्थन किया और कहा कि यह कदम कामकाज में अधिक अनुशासन लाने के प्रयास का हिस्सा है।
गिरि ने कहा कि अयोध्या में दान चोरी की कथित घटना निरंतर निगरानी से रोकी जा सकती थी और ट्रस्ट ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं चाहता।
उन्होंने कहा, “अगर हम इन सब बातों पर ध्यान नहीं देंगे, तो संभावना है कि यहां जैसी घटना हुई, वैसी फिर हो सकती है। हम ऐसी चीजों को दोहराना नहीं चाहते।”
गिरि ने कहा कि मंदिर में छोटी सी चोरी भी गंभीर मामला है, हालांकि उन्होंने दावा किया कि असल घटना उन आंकड़ों से कहीं छोटी थी जो बाद में फैलाए गए।
उन्होंने कहा, “भगवान राम के दरबार में छोटी सी चोरी भी मेरे लिए गंभीर अपराध है।” उन्होंने यह भी कहा कि किसी को ऐसा अपराध करने का अवसर न मिले, यह सुनिश्चित करना ट्रस्ट का “पहला कर्तव्य” है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न कर्मियों के बीच जिम्मेदारियों के बंटवारे के बाद निरंतर निगरानी जरूरी होगी।
गिरि ने कहा, “एक बार कोई काम शुरू हो गया, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह हमेशा ठीक से चलता रहेगा। व्यक्ति का मन चंचल है और बदलता है।”
एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट के पहले सीईओ के रूप में नियुक्त करने को आवश्यक बताते हुए गिरि ने कहा कि मंदिर की धार्मिक परंपराएं और अनुष्ठान संतों और विद्वान आचार्यों के मार्गदर्शन में रहेंगे, जबकि प्रशासनिक और परिचालन कार्यों के लिए पेशेवर प्रबंधन की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, “कभी-कभी ऐसा लग सकता है... यह एक मंदिर है, तो यहां कॉर्पोरेट व्यवस्था की क्या जरूरत है? मंदिर की पूजा, उत्सव और परंपराएं संतों और विद्वान आचार्यों का काम हैं... लेकिन कर्मचारियों का प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाएं व्यावहारिक आधार पर होनी चाहिए, और उसके लिए हमें आधुनिक तरीके अपनाने होंगे।”
गिरि ने कहा कि ट्रस्ट को एक ऐसे पेशेवर व्यक्ति की जरूरत थी, जो परिसर में रहे और यह सुनिश्चित करे कि प्रशासनिक व्यवस्थाएं अनुशासित तरीके से संचालित हों।
उन्होंने मिश्रा की प्रशंसा करते हुए कहा कि नए सीईओ “राम भक्त” और धार्मिक प्रवृत्ति वाले व्यक्ति हैं जो आध्यात्मिक आचरण का पालन करते हैं।
गिरि ने कहा, “यह जानकर हमें बहुत खुशी हुई कि वह मूल रूप से बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं, जो अनुशासित आचरण का पालन करते हैं और स्वयं गीता पढ़ते हैं।”
उन्होंने कहा, “जब मैंने उन्हें गीता की एक प्रति दी, तो उन्होंने कहा, ‘मैं स्वयं हर दिन गीता का एक अध्याय पढ़ता हूं’।”
गिरि ने कहा कि मिश्रा का धार्मिक दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि मंदिर की परंपराओं से समझौता किए बिना अनुशासन बना रहे।
उन्होंने कहा, “जो भी समर्पित रहता है और धर्म में आस्था रखता है, वह कभी भी भक्ति के साथ-साथ अनुशासन से समझौता नहीं होने देगा।”
उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों में मिश्रा को मंदिर परिसर, उसके कर्मियों और कर्मियों की जिम्मेदारियों से परिचित कराने के लिए तीन विस्तृत बैठकें हुई हैं।
गिरि ने कहा कि ट्रस्ट पारंपरिक प्रथाओं को आधुनिक प्रबंधन प्रणालियों के साथ जोड़ेगा और यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
उन्होंने कहा, “शुरुआत पहले ही हो चुकी है और आप कल से इसका असर देखना शुरू कर देंगे। हमने श्रृंगार आरती की व्यवस्था बदल दी है।”
उन्होंने बताया कि ट्रस्ट सीता रसोई अन्न क्षेत्र की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा कर रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को अधिक गरिमा और सुविधा के साथ प्रसाद मिल सके। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट तीर्थयात्रियों और आगंतुकों के लिए सुविधाओं में सुधार के लिए भी काम करेगा और अयोध्या के संतों और स्थानीय निवासियों को मंदिर से और अधिक निकटता से जोड़ने का प्रयास करेगा।
भाषा चंदन आनन्द संतोष
संतोष