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शोध से वास्तविक समस्याओं का समाधान होना चाहिए: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

चंडीगढ़, चार सितंबर (भाषा) उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को पंजाब विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं और नवोन्मेषकों से आह्वान किया कि शोध को वास्तविक समस्याओं के समाधान और समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने की दिशा में केंद्रित किया जाना चाहिए।

राधाकृष्णन ने यहां पंजाब विश्वविद्यालय का दौरा किया और अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरण सुविधा/केंद्रीय उपकरण प्रयोगशाला (एसएआईएफ/सीआईएल) में उन्नत अत्याधुनिक उपकरण सुविधा का उद्घाटन किया।

उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय प्रौद्योगिकी नवाचार मंच (पीयू टीआईएफ) का भी उद्घाटन किया, जो पहले बायोनेस्ट के नाम से जाना जाता था। यह मंच पूर्व-प्रारंभिक चरण, प्रारंभिक चरण और बाद के चरण के लिए एकीकृत सुविधा उपलब्ध कराता है।

अत्याधुनिक उपकरण सुविधा के उद्घाटन का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी शोध का समाज पर असर पड़ना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘हम जो भी शोध करते हैं, जब तक वह शोध समाज पर प्रभाव नहीं डालता, तब तक उसके परिणाम की सफलता केवल हमारे विश्वविद्यालय की चारदीवारी तक ही सीमित रहेगी। हमें सही दिशा में शोध करना चाहिए, ताकि हमारे शोध के निष्कर्ष पूरे समाज के लिए उपयोगी साबित हों।’’

शोधकर्ताओं और नवोन्मेषकों के साथ अपने विचार साझा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विज्ञान को हमेशा किसी मकसद से जुड़ा रहना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हमें तकनीक का इस्तेमाल केवल अधिक आंकड़े जुटाने के लिए नहीं करना चाहिए। हमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल समाज के सामने मौजूद वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए जरूरी सवाल उठाने में करना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘असफलता से निराश नहीं होना चाहिए। शोध में सबसे पहली बात जो हमें सीखनी चाहिए, वह यह कि हमें असफल होना चाहिए। हमें असफल होना चाहिए ताकि हमें पता चल सके कि हमसे गलती कहां हुई। हमें असफल होना चाहिए ताकि हमारी मानसिक शक्ति बढ़े। असफलताओं से हमें हतोत्साहित नहीं होना चाहिए।’’

उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘अपने नवाचारों को समावेशी बनाएं। हमारे समाधान ऐसे होने चाहिए, जिन्हें बड़े स्तर पर अपनाया जा सके और जो किफायती हों। उन्हें समाज और उद्योग की वास्तविक जरूरतों को पूरा करना चाहिए तथा उनकी मांगों के अनुरूप होना चाहिए। इसलिए हमारा शोध हमेशा स्पष्ट उद्देश्य और सही दिशा में केंद्रित होना चाहिए।’’

उपराष्ट्रपति ने छात्रों से नशीले पदार्थों से दूर रहने का भी आह्वान किया। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं से असफलताओं से हताश नहीं होने को कहा।

उन्होंने कहा, ‘‘मानसिक शक्ति सबसे बड़ी शक्ति है। सबसे पहले यह समझना चाहिए कि असफलता हमारे जीवन का हिस्सा है। मैं भी कई बार असफल हुआ हूं, केवल अपने प्रयासों की वजह से नहीं, बल्कि दूसरों के प्रयासों के कारण भी।’’

राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘पीठ पीछे वार करने वाले लोग हर जगह मिलेंगे। आप मनीष तिवारी जी से पूछ सकते हैं कि उन्होंने अपने करियर में कितनी बार ऐसे अनुभवों का सामना किया है। यहां मंच पर बैठे हर व्यक्ति, जिसमें मैं भी शामिल हूं, को इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।’’

उन्होंने यह भी कहा कि भारत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध और नवाचार के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है।

यह पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के कुलाधिपति के रूप में उपराष्ट्रपति का विश्वविद्यालय का पहला दौरा था।

इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष और चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी भी मौजूद थे।

भाषा आशीष अविनाश

अविनाश