नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) कुवैत में घरेलू सहायिका के तौर पर काम कर रही मूल रूप से तमिलनाडु की एक महिला द्वारा सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर नियोक्ता पर यातना देने और महीनों से वेतन का भुगतान नहीं करने के आरोप लगाए जाने के बाद वहां के भारतीय दूतावास ने मदद की पहल की है।
वीडियो में, तमिलनाडु की वनिता नाम की महिला ने अपने गृह राज्य के अधिकारियों से भारत लौटने में मदद की अपील की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल की नियमित प्रेस वार्ता में इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि दूतावास ने महिला की मदद की है।
उन्होंने कहा, ‘‘जैसे ही हमारे दूतावास को इस मामले की जानकारी मिली, उसने मदद की पेशकश की।’’
जायसवाल ने कहा, ‘‘वह इस समय हमारे दूतावास में हैं। हम विदेशों में भारतीय नागरिकों की भलाई, सुरक्षा और कल्याण के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’
तमिलनाडु के कल्लाकुरिची जिले की रहने वाली वनिता ने अपने नियोक्ताओं पर प्रताड़ित करने, भूखा रखने और मजदूरी का भुगतान न करने का आरोप लगाया।
उसने बताया कि वह तीन महीने पहले एक रोजगार एजेंट के माध्यम से कुवैत गई थी।
महिला द्वारा पोस्ट वीडियो में वह स्कार्फ से सिर ढके हुए दिखाई दे रही हैं। वनिता ने आरोप लगाया कि उसे 50 से अधिक दिनों तक ठीक से खाना नहीं दिया गया और पिछले दो महीनों से वेतन भी नहीं दिया जा रहा है।
महिला ने हाथ जोड़कर कहा, ‘‘वे मुझे प्रताड़ित कर रहे हैं... मैं जिलाधिकारी मैडम और पुलिस अधीक्षक मैडम से अनुरोध करती हूं कि वे किसी तरह मुझे बचाएं और मेरी मातृभूमि लौटने में मेरी मदद करें।’’
जायसवाल ने कश्मीर मुद्दे पर बर्मिंघम के महापौर जाकिर चौधरी की कथित टिप्पणियों से जुड़े एक सवाल का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘‘पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं।’’
भाषा धीरज अविनाश
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