(जीवन प्रकाश शर्मा)
नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कर्मियों द्वारा आगरा कैंट स्टेशन मास्टर के साथ कथित तौर पर मारपीट मामले की जांच करने वाली विशेषज्ञ समिति ने आरपीएफ कर्मियों को भावनात्मक रूप से संवेदनशील, विवाद प्रबंधन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का प्रशिक्षण देने का सुझाव दिया है।
तीन सदस्यीय समिति ने इस घटना के लिए आरपीएफ के चार कर्मियों को दोषी भी पाया है।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘‘आरपीएफ कर्मियों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में भावनात्मक समझ, विवाद प्रबंधन और अंतर-विभागीय समन्वय को पर्याप्त रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि वे संवेदनशील परिस्थितियों से निपटते समय नियमों के अनुसार संयमित और पेशेवर व्यवहार कर सकें।’’
बारह जुलाई को आरपीएफ के कुछ कर्मियों ने आगरा कैंट स्टेशन मास्टर नरेंद्र सिंह चाहर के साथ कथित रूप से मारपीट की। यह घटना तब हुई जब स्टेशन मास्टर ने निर्धारित ठहराव के दौरान ट्रेन में चढ़ने में असमर्थ दो यात्रियों की मदद के लिए हीराकुड एक्सप्रेस को रोक दिया था।
आरपीएफ कर्मियों को लगा कि यह आपातकालीन चेन खींचने का मामला है और वे यात्रियों पर जुर्माना लगाना चाहते थे। इसको लेकर स्टेशन मास्टर और आरपीएफ कर्मियों के बीच विवाद हो गया, जिसके बाद उन्होंने स्टेशन मास्टर के साथ कथित तौर पर मारपीट की और उनका अपमान किया।
घटना के तुरंत बाद रेलवे ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने के अलावा वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त का तबादला कर दिया था तथा आरपीएफ के चार आरोपी कांस्टेबल को निलंबित कर दिया था।
समिति ने रेलवे के सुचारू और यात्रियों के अनुकूल संचालन के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय बढ़ाने के उद्देश्य से 11 सिफारिशें की हैं।
एक सिफारिश में कहा गया है, ‘‘ड्यूटी पर तैनात रेलवे कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार या अपमानजनक व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य है। इस संबंध में विभागों के बीच समन्वय और संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए आवश्यक दिशानिर्देश जारी किए जाने चाहिए।’’
समिति ने स्टेशन कर्मचारियों के पेशेवर आचरण की भी सराहना की और कहा कि भावनाएं उग्र होने के बावजूद उन्होंने ट्रेनों का परिचालन निर्बाध रूप से जारी रखा।
भाषा शफीक नरेश
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