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जाति प्रमाणपत्र के कारण अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ मुंबई की पूर्व मेयर राउत की याचिका खारिज

मुंबई, दो सितंबर (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को शिवसेना (उबाठा) की बीएमसी पार्षद और मुंबई की पूर्व मेयर विशाखा राउत की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने गलत जाति प्रमाणपत्र से जुड़े नगर निकाय आयुक्त के आदेश को चुनौती दी थी।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) आयुक्त ने गलत जाति प्रमाणपत्र जमा करने के कारण राउत को पद से हटाने और सरकार से उनकी अयोग्यता को अधिसूचित करने का आग्रह किया था।

पिछले महीने, जिला जाति जांच समिति ने राउत का ओबीसी प्रमाणपत्र अमान्य कर दिया। समिति का कहना था कि जिस अधिकारी ने यह प्रमाणपत्र जारी किया था, उसे ऐसा करने का अधिकार नहीं था।

इसके बाद, बीएमसी आयुक्त ने उन्हें पद से हटाने का आदेश जारी किया और राज्य सरकार को सूचित किया कि उन्हें छह साल के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित करने की सूचना सरकारी राजपत्र में प्रकाशित की जाए।

राउत की याचिका में कहा गया था कि उनकी अपील पर सुनवाई पूरी होने तक अयोग्य ठहराने की कार्रवाई पर अनिवार्य रूप से 90 दिनों की रोक होती है।

हालांकि, न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने कहा कि यह दलील सुनने में तो आकर्षक लगती हैं, लेकिन गहराई से जांच करने पर यह टिक नहीं पायीं। पीठ ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि बीएमसी आयुक्त के पास ऐसे आदेश जारी करने का अधिकार नहीं था।

अदालत ने कहा, ‘‘एक बार जब जाति प्रमाणपत्र को गलत घोषित कर दिया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के अयोग्य ठहराए जाने का कानूनी परिणाम सामने आता है। इसलिए, हमें आदेशों में कोई गैरकानूनी बात नहीं दिखती... याचिका में कोई दम नहीं है और यह खारिज की जाती है।’’

राउत ने 2005 में जारी एक प्रमाणपत्र पेश किया था, जिसमें उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कुनबी समुदाय का बताया गया था। लेकिन अगस्त 2026 में, जाति प्रमाणपत्र की जांच करने वाली कमिटी ने इसे ‘‘गलत’’ बताकर अमान्य कर दिया।

भाषा सुभाष नरेश

नरेश