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ट्रांसजेंडर की गिरफ्तारी से संबंधित एसओपी के लिए कदम उठाएं: अदालत का केंद्र, दिल्ली पुलिस को निर्देश

नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र और दिल्ली पुलिस से कहा कि वे यहां ट्रांसजेंडर लोगों की गिरफ्तारी एवं हिरासत के संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने के लिए उचित कदम उठाएं।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने एक विधि छात्र की जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, पुलिस और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया तथा उनसे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा जारी किए गए परामर्श पर विचार करने को कहा।

तारण चंदना की याचिका में कहा गया कि हालांकि दिल्ली पुलिस के पास महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की गिरफ्तारी के लिए एक स्थायी आदेश है, लेकिन यह ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के मामले में ‘‘पूरी तरह से चुप’’ है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि मई में, एनएचआरसी ने ट्रांसजेंडर लोगों की गिरफ्तारी, हिरासत, तलाशी, पूछताछ और जेल में रखने की प्रक्रिया के संबंध में व्यापक एसओपी बनाने के उद्देश्य से ‘ट्रांसजेंडर लोगों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए परामर्श, 2.0’ जारी किया था।

उन्होंने कहा कि हालांकि दिल्ली के लिए ऐसी कोई एसओपी या दिशा-निर्देश नहीं बनाए गए हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘हम भारत सरकार, दिल्ली पुलिस और राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने को कहते हैं। इस बीच, हम निर्देश देते हैं कि मई 2026 में जारी परामर्श पर विचार किया जाए और कानून के तहत उचित कदम उठाए जाएं।’’

अदालत ने अधिकारियों से यह भी कहा कि वे परामर्श के अनुपालन में उठाए गए कदमों की जानकारी प्रदान करते हुए हलफनामा दाखिल करें।

पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख निर्धारित कर दी।

भाषा नेत्रपाल नरेश

नरेश