Breaking News

'हम किसी के विरुद्ध नहीं, सबके साथ हैं': PM मोदी     |   आनंद कुमार के बेटों पर मायावती का बड़ा फैसला, BSP में नहीं मिलेगी जगह     |   BRICS समिट 2026: शी जिनपिंग ने ग्रुप से ग्लोबल शांति में अहम भूमिका निभाने को कहा     |   BRICS समिट में नई दिल्ली घोषणा पत्र को मंजूरी, PM मोदी बोले- सर्वसम्मति से अपनाया गया     |   PM मोदी के सार्वजनिक जीवन और शासन के 25 वर्ष पूरे होने पर बीजेपी विशेष कार्यक्रम आयोजित करेगी     |  

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बर्नहम पद संभालने के बाद पहली बार सांसदों के सामने होंगे पेश

लंदन, एक सितंबर (एपी) ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम छह हफ्ते पहले ब्रिटेन का नेता बनने के बाद मंगलवार को पहली बार ब्रिटिश संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में सांसदों के सामने पेश होंगे। यूरोप और पश्चिम एशिया में जारी युद्धों के कारण अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने और जीवन-यापन का खर्च कम करने के उनके वादे पर दबाव बना हुआ है।

बर्नहम ने 20 जुलाई को पद संभालने के बाद से देश भर में यात्रा की है और अपने पूर्ववर्ती केअर स्टार्मर के निराशाजनक दो साल के कार्यकाल के बाद देश में नई उम्मीद जगाने का वादा किया है।

उन्होंने लोगों और व्यवसायों को थोड़ी राहत देने के मकसद से पैसे बचाने वाले कुछ उपाय घोषित किए हैं, जिनमें घरेलू ऊर्जा बिलों पर कर में कटौती और पब एवं नाइटक्लब पर शुल्क कम करना शामिल है।

लेकिन न तो विपक्षी और न ही उनकी अपनी लेबर पार्टी के सांसद ही ईरान युद्ध से जुड़े बढ़ते सुरक्षा खतरों और आर्थिक दबाव के मुश्किल हालात में किए गए वादों की बारीकियों पर उनसे कड़े सवाल पूछ पाए हैं।

कंजर्वेटिव नेता केमी बैडेनोच, जिन्होंने सोमवार को अर्थव्यवस्था और विदेश मामलों के लिए नए प्रवक्ता नियुक्त करके अपनी शीर्ष टीम में फेरबदल किया था, उन्हें आखिरकार मंगलवार को बर्नहम से तीखे सवाल पूछने का मौका मिलेगा, जब संसद गर्मियों की छुट्टी के बाद फिर से शुरू होगी।

ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर के तौर पर लगभग एक दशक तक केंद्र की राजनीति से बाहर रहने के बाद बर्नहम जून में संसद के लिए चुने गए थे। वह हाउस ऑफ कॉमन्स में एक बयान देने वाले हैं। इसमें वे एक ज्यादा सक्रिय लेकिन कम केंद्रीकृत राष्ट्र के लिए अपना नजरिया रखेंगे।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि बर्नहम “हालात को बेहतर बनाने के लिए एक साफ योजना” पेश करेंगे।

उम्मीद है कि वे कहेंगे कि पानी, ऊर्जा और परिवहन पर ज्यादा सरकारी नियंत्रण से आर्थिक विकास हो सकता है और परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हो सकता है, हालांकि यह साफ नहीं है कि वे अर्थव्यवस्था के अहम हिस्सों के दशकों से चले आ रहे निजीकरण को किस हद तक पलटने की योजना बना रहे हैं।

एपी प्रशांत रंजन

रंजन