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लोकसभा की मौजूदा सीट संख्या में फेरबदल पर रोक लगाने का कांग्रेस का प्रस्ताव लोकतंत्र के खिलाफ: शिअद

चंडीगढ़, 28 अगस्त (भाषा) शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने शुक्रवार को कहा कि लोकसभा की मौजूदा सीट संख्या में फेरबदल पर अगले 25 वर्षों तक रोक लगाने का कांग्रेस का प्रस्ताव लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की भावना के खिलाफ है।

पार्टी ने कहा कि यह लोकसभा और विधानसभा के निर्वाचन क्षेत्रों को कृत्रिम रूप से सीमित करके युवा नेतृत्व के लिए रास्ते बंद करने के समान है।

शिअद के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के इस सुझाव को ‘तर्कहीन और बिना सोचे-समझे दिया गया प्रस्ताव’ करार दिया।

चीमा ने कहा, ‘‘वर्ष 1971 (जब भारत की आबादी केवल 54.8 करोड़ थी), के बाद से करीब 55 वर्षों से सीट की संख्या में फेरबदल पर रोक लगी हुई है। आज आबादी करीब 140 करोड़ है।”

चीमा ने कहा कि अगले 25 वर्षों तक और रोक लगाने से यह संकट और गहरा जाएगा, क्योंकि प्रभावी प्रतिनिधित्व के लिहाज से निर्वाचन क्षेत्र बहुत बड़े हो जाएंगे जिनका प्रबंधन करना कठिन हो जाएगा।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अनुरोध किया था कि सरकार परिसीमन को लेकर अपने प्रस्ताव सभी राजनीतिक दलों के साथ साझा करे।

उन्होंने लोकसभा की मौजूदा 543 सीट में फेरबदल पर 25 साल तक रोक लगाने और 2029 के चुनाव से महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने की मांग भी की थी।

प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में खरगे ने परिसीमन के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने और सभी राजनीतिक दलों तथा राज्य सरकारों को इन प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की।

खरगे ने कहा कि कांग्रेस का रुख स्पष्ट है और पार्टी चाहती है कि अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की मौजूदा 543 सीट को बरकरार रखा जाए। उन्होंने कहा कि इसी तरह राज्यवार लोकसभा सीट संख्या को भी अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखा जाए और 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण दिया जाए।

शिअद नेता चीमा ने कहा कि परिसीमन के कारण पंजाब और दक्षिणी राज्यों को लोकसभा की सीट गंवानी पड़ सकती हैं, जबकि अधिक आबादी वाले मध्य और उत्तरी भारत के राज्यों को अधिक सीट मिल सकती हैं। उन्होंने कहा कि इससे भारत के संघीय संतुलन पर असर पड़ेगा।

चीमा ने कहा कि ऐसी स्थिति में समाधान अनिश्चितकाल तक सीट संख्या पर रोक लगाने या उन राज्यों को दंडित करने में नहीं है, जिन्होंने जनसंख्या को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है।

चीमा ने कहा कि इसके बजाय, लोकसभा की कुल सीट की संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि की जानी चाहिए।

भाषा संतोष सुभाष

सुभाष