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मदरसे में लड़के का यौन उत्पीड़न करने के प्रयास में व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज

नागपुर, 23 जून (भाषा) नागपुर के एक मदरसे में नाबालिग लड़के का यौन उत्पीड़न करने के प्रयास के आरोप में शिक्षक के मित्र के खिलाफ मामला दर्ज किया है और संस्थान से 10 नाबालिग बच्चों को निकाल लिया गया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

सक्करदरा थाना प्रभारी रमेश खुने ने 'पीटीआई वीडियो' को बताया कि यह मदरसा नागपुर के ताजबाग इलाके में स्थित है और यहां 10 बच्चे रह रहे थे जिनमें से अधिकांश मध्य प्रदेश और बिहार से थे। ये सभी यहां अरबी और उर्दू की पढ़ाई कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि बिहार का रहने वाला आरोपी (26) मदरसे के शिक्षक का दोस्त है और वह यहां आया हुआ था। आरोप है कि 19 जून की तड़के, जब 16 वर्षीय एक लड़का वहां सो रहा था तो आरोपी ने उसका यौन शोषण करने की कोशिश की।

अधिकारी ने बताया कि अगली सुबह लड़के ने अपने शिक्षक को घटना के बारे में सूचित किया। आरोपी से पूछताछ करने के बाद शिक्षक ने उसे परिसर से बाहर निकाल दिया।

पुलिस ने बताया कि इस संबंध में 21 जून को आरोपी के ख़िलाफ़ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

अधिकारी ने बताया कि फरार आरोपी को पकड़ने की कोशिशें जारी हैं। मदरसे से दस लड़कों फिलहाल बाल आश्रय गृह में रखा गया है।

महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इस संबंध में शिकायत मिलते ही उन्होंने तुरंत नागपुर के संयुक्त पुलिस आयुक्त से तुरंत कार्रवाई करने को कहा।

उन्होंने बताया कि करीब 10 बच्चे उनके पास आए थे, जिनमें से दो ने दावा किया कि उनके साथ “कुछ गलत हुआ है”।

उन्होंने कहा कि हमने पुलिस से पूरे मामले की जांच करने और यह पता लगाने को कहा है कि वास्तव में क्या हुआ।

अधिकारी ने बताया कि बच्चों को एक छोटे कमरे में रखा गया था जिसकी हालत काफी खराब थी।

उन्होंने कहा, “ऐसे और भी मदरसे हैं। ये सही मायनों में मदरसे नहीं हैं। एक छोटे से कमरे में आठ से 10 बच्चों को रखा गया था। ऐसा लगता है कि सरकार की ‘मदरसा आधुनिकीकरण’ योजना का भी दुरुपयोग किया जा रहा है और कुछ अधिकारी इसमें शामिल हैं।”

उन्होंने कहा कि छह महीने पहले आयोग ने राज्य के सभी मदरसा प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी और उन्हें बाहरी बच्चों को लाने से मना किया था।

खान ने कहा, “अगर माता-पिता अपने बच्चों को लाते हैं और आप उन्हें शिक्षा देते हैं, तो वह अलग बात है। लेकिन बच्चों को लाकर उनके नाम पर चंदा इकट्ठा करना और उनका शोषण करना अपराध है। ऐसे मदरसों के खिलाफ हम सख्त कार्रवाई कर रहे हैं।”

अधिकारी ने कहा, इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

भाषा प्रचेता नरेश

नरेश