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जब माओवादी हिंसा चरम पर थी, तब संविधान दिखाने वालों के हाथ कांप रहे थे : प्रधानमंत्री मोदी

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 22 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में दशकों तक जारी माओवादी हिंसा को लेकर सोमवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।

उन्होंने कहा कि जो लोग आज संविधान की प्रतियां लहरा रहे हैं, उनके हाथ तब ऐसा करने से कांपते थे, जब माओवादी हिंसा चरम पर थी।

दिल्ली में ‘रिपब्लिक समिट 2026’ को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत न केवल तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश है, बल्कि एक विश्वसनीय और भरोसेमंद वैश्विक शक्ति भी है और देश अगले 1,000 वर्षों का भविष्य गढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकारों ने नक्सलवाद-प्रभावित इलाकों को पिछड़ा इलाका करार दिया था, लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने इन इलाकों को बदलने की चुनौती स्वीकार की, वहां के लोगों को निराशा से बाहर निकलने में मदद की और उनमें तरक्की की उम्मीद जगाई।

मोदी ने कहा कि इस नये नजरिये को ध्यान में रखते हुए उनकी सरकार ने उन इलाकों का नाम बदलकर “आकांक्षी जिले और प्रखंड” कर दिया है और आज ये आकांक्षी जिले और प्रखंड उन क्षेत्रों की तरक्की को गति दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन इलाकों में आबादी का एक बड़ा हिस्सा गरीबी में रहता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।

उन्होंने कहा कि इस कामयाबी में आकांक्षी जिलों ने अहम भूमिका निभाई है और जो इलाके कभी नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहां अब विकास की नयी किरण दिखाई दे रही है।

मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में भी चरमपंथियों ने आदिवासी इलाकों में कोई भी सुविधा स्थापित नहीं होने दी।

उन्होंने कहा कि वहां से सरकारी गाड़ी भी नहीं गुजर सकती थी, क्योंकि उस पर गोलियां बरसा दी जाती थीं।

मोदी ने कहा कि सरकारें आईं और गईं, पीढ़ियां आईं और गईं और ऐसा लगा कि हिंसा की यह बदकिस्मती यूं ही बनी रहेगी।

उन्होंने कहा, “2004 से 2014 के बीच माओवादी उग्रवाद के कारण हिंसा की 17,000 से ज्यादा घटनाएं हुईं और लगभग 7,000 लोगों की जान गई। 2014 के बाद हमने स्थिति को बदलने के लिए ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प के साथ कदम आगे बढ़ाए।”

मोदी ने कहा, “आज देश में माओवादी उग्रवाद अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है। यह इसलिए संभव हो पाया, क्योंकि इसके लिए पूर्ण समर्पण की आवश्यकता थी। आज जो लोग संविधान की प्रतियां लहरा रहे हैं, उस समय उनके हाथ संविधान दिखाने में भी कांपते थे।”

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अलग-अलग मौकों पर संविधान की प्रति लिए हुए देखा गया है, जिसमें 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद सांसद के तौर पर शपथ लेने का अवसर भी शामिल है।

प्रधानमंत्री ने उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो अलग-अलग विकास परियोजनाओं का विरोध करते हैं।

उन्होंने कहा कि यही लोग पहले खनिजों के खनन का विरोध करते थे, लेकिन साथ ही यह भी पूछते थे कि भारत का धुर्लभ खनिज भंडार कहां है, आपूर्ति शृंखला कहां है और यहां दूसरे देशों जैसा इलेक्ट्रिक वाहन पारिस्थितिकी तंत्र क्यों नहीं है।

उन्होंने कहा, “ये वही लोग हैं, जिन्होंने कभी ‘डेटा बनाम आटा’ पर बहस की थी और खूब मजे लिए थे। आज, यही लोग कहते हैं कि मोदी जी, हमें बताइए कि एआई के क्षेत्र में क्या काम हुआ है?”

मोदी ने कहा, “हद तो देखिए, एक ही पल में वे कहते हैं कि एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के क्षेत्र में यह होना चाहिए था, वह होना चाहिए था, ऐसा क्यों नहीं हुआ? लेकिन ठीक अगले ही पल, वही लोग सवाल उठाते हैं कि अरे, आप यह डेटा सेंटर क्यों बना रहे हैं? आप यह सेमीकंडक्टर संयंत्र क्यों लगा रहे हैं?”

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे लोग भारत को कटघरे में खड़ा करने के लिए भ्रष्टाचार से जुड़े तमाम वैश्विक सूचकांक का जिक्र करते हैं और उनकी समर्थक मीडिया इसे 24 घंटे दिखाती है, लेकिन जब भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई होती है या सख्त कदम उठाए जाते हैं, तो यही लोग सबसे ज्यादा शोर मचाते हैं।

उन्होंने कहा, “सबसे पहले हंगामा कौन मचाता है? वही लोग। वे कहते हैं कि यह गलत है, एक्स को निशाना बनाया गया, वाई को निशाना बनाया गया, छापेमारी हुई, जांच शुरू हुई, वे लोगों को परेशान कर रहे हैं। सवाल उठाए जाते हैं : कार्रवाई इस तरह क्यों हो रही है, उस तरह क्यों नहीं? अभी क्यों, तब क्यों नहीं? ए को निशाना क्यों बनाया जा रहा है, बी को क्यों नहीं? यही उनका खेल है।”

मोदी ने कहा कि भारत के लिए इन लोगों के चरित्र को समझना बहुत जरूरी है; खासकर देश के युवाओं को इन्हें पहचानना होगा और ‘जेन जेड’ को तो इसे बहुत जल्दी समझना होगा।

उन्होंने कहा, “एक तरफ तो ये लोग कहते हैं कि देश की सेनाओं के पास आजादी की कमी है और उन्हें हथियार नहीं मिल रहे। लेकिन जैसे ही सरकार कोई रक्षा समझौता करती है या आधुनिक हथियार खरीदती है, तो सबसे पहले यही लोग सवाल उठाते हैं कि इसे क्यों खरीदा गया?”

मोदी ने कहा, “वे दुनियाभर में भारत की कूटनीति पर सवाल उठाएंगे, लेकिन जब भारत अपनी कूटनीति और सुरक्षा के लिए कहीं कोई बुनियादी ढांचा परियोजना शुरू करता है, तो ये लोग हंगामा खड़ा करने के लिए शोर-शराबा शुरू कर देते हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत जिस अहम दौर से गुजर रहा है, उसमें ऐसे लोगों की पहचान करना, उनके गलत तर्क को समझना और उनके प्रति सतर्क रहना जरूरी है।

उन्होंने कहा, “और दुर्भाग्य से आज देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर ऐसे लोगों का कब्जा हो गया है। यह सोचना भी कि कांग्रेस कभी ‘राष्ट्र प्रथम’ की बात करेगी, अब एक झूठे सपने जैसा हो गया है। कोई यह सोच भी नहीं सकता कि गांधीजी के दौर में जो भावना थी, क्या वह कभी कांग्रेस में वापस आएगी।”

मोदी ने कहा कि लोग उनसे उम्मीदें रखते हैं, जो काम करके दिखाते हैं; और सिर्फ़ आम लोग ही नहीं, बल्कि पूरी कांग्रेस पार्टी भी कहती रहती है कि मोदी को यह करना चाहिए, वह करना चाहिए, क्योंकि वे भी मानते हैं कि अगर कोई यह काम कर सकता है, तो वह सिर्फ मोदी ही है।

उन्होंने कहा, “आकांक्षा वहां होती है, जहां लोगों को लगता है कि सपने सच हो सकते हैं। आज भारत के युवाओं, गरीबों और मध्यम वर्ग की यही आकांक्षा है।”

मोदी ने कहा कि तेजी से विकास के अलावा भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विश्वसनीयता के लिए भी पहचाना जा रहा है।

उन्होंने कहा, “हम वो लोग हैं, जिन्होंने विकास और विनाश, दोनों को देखा और सहा है। हम वो देश हैं, जिसके जहन में कई युगों की यादें बसी हुई हैं। इसलिए भारत जो कर रहा है, वह अगले 1,000 वर्षों के भविष्य की रूपरेखा तैयार कर रहा है और यह दुनिया के लिए भारत की सबसे बड़ी गारंटी है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत न केवल तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, बल्कि एक विश्वसनीय और भरोसेमंद वैश्विक शक्ति भी है।

उन्होंने कहा, “हाल में जी7 शिखर सम्मेलन से लौटने के बाद मैंने देखा कि दुनियाभर के नेता और देश इस बात को मानते हैं और इसकी सराहना करते हैं कि आज के भारत के लिए ‘राष्ट्र प्रथम’ ही सबसे बड़ा मंत्र और सबसे बड़ा सिद्धांत है।”

मोदी ने कहा कि सपना जितना बड़ा होगा, सरकार की कोशिशें भी उतनी ही जबरदस्त होंगी। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों की सामूहिक कोशिशों से “एक विकसित भारत का निर्माण होगा।”

भाषा पारुल जोहेब

जोहेब