भुवनेश्वर, 22 जून (भाषा) ओडिशा में उस ग्रामीण बैंक शाखा के प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया है, जहां एक आदिवासी व्यक्ति अपनी बहन की मौत का सबूत देने के लिए उसका कंकाल लेकर पहुंचा था ताकि उसके बचत खाते में जमा राशि निकाली जा सके।
प्रबंधक को निलंबित किए जाने के साथ ही सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को निर्देश जारी किया गया है कि ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोका जाए, खासकर ग्रामीण, आदिवासी और कमजोर वर्गों के ग्राहकों के मामले में।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक को लिखे पत्र में मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी दी। पटनायक ने दो मई को चौधरी को पत्र लिखकर बैंक शाखा में प्रक्रियात्मक देरी के कारण परिवार को हुई परेशानी का जिक्र किया था।
चौधरी ने 12 जून को पटनायक के पत्र का जवाब देते हुए कहा कि ओडिशा ग्रामीण बैंक के साथ इस मामले पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि बैंक ने बताया है कि मृतक के खाते से किसी नामित का नाम नहीं जुड़ा हुआ था, इसलिए दावे के निपटारे के लिए तय दस्तावेज जमा करने की जरूरत थी, जिनमें मृत्य प्रमाणपत्र और कानूनी वारिस की जानकारी शामिल है।
चौधरी के मुताबिक, बैंक ने यह भी बताया कि स्थानीय प्रशासन के दखल के बाद जरूरी दस्तावेज जारी किए गए और 19,402 रुपये की दावा राशि जीतू मुंडा और दिवंगत खाताधारक कालरा मुंडा के दो कानूनी वारिसों को सौंप दी गई।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “हालांकि, वित्तीय सेवा विभाग ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। विभाग मानता है कि बैंकिंग कामकाज में तय प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करना जरूरी है, लेकिन यह भी उतना ही आवश्यक है कि इन प्रक्रियाओं को संवेदनशीलता, सहानुभूति और असरदार बातचीत के साथ लागू किया जाए, खासकर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में।”
उन्होंने बताया कि ओडिशा ग्रामीण बैंक ने अपनी मल्लिपोसी शाखा के प्रबंधक को निलंबित कर दिया है, जहां यह घटना हुई थी।
चौधरी ने बताया कि बैंक ने अपने बोर्ड की मंजूरी से सभी फील्ड कर्मचारियों के लिए एक परामर्श जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि वे सभी ग्राहकों के प्रति सहानुभूति रखें और उन्हें पारदर्शी सेवाएं दें।
उन्होंने बताया कि देश के 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में नागरिक-केंद्रित बैंकिंग सेवाओं को मजबूत करने और ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए वित्तीय सेवा विभाग ने एक परामर्श जारी कर कहा कि इन बैंकों को ग्राहकों को तेजी से प्रतिक्रिया देने वाली संवेदनशील और पारदर्शी सेवाएं सुनिश्चित करनी चाहिए।
भाषा पारुल जोहेब
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