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तृणमूल के बागी गुट ने विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना, पार्टी का समानांतर ढांचा पेश किया

कोलकाता, 22 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण की कोशिश में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने सोमवार को विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना। यह पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी के प्राधिकार को अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है।

इस कदम से संकेत मिलता है कि विधानसभा से शुरू हुई और बाद में संसद तक फैली बगावत अब पार्टी के संगठनात्मक गढ़ तक पहुंच गई है।

यहां बागी विधायकों, पार्षदों और अन्य नेताओं की मौजूदगी में एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि रॉय को सर्वसम्मति से पार्टी का अध्यक्ष चुना गया।

पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास और विधायक फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया, जबकि ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव बनाया गया।

रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां अंसारी को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया।

बैठक के बाद बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, ‘‘तृणमूल कांग्रेस नेताओं और सदस्यों के विशेष सत्र में सर्वसम्मति से अरूप रॉय को पार्टी का अध्यक्ष चुना गया।’’

बागी गुट के नेता ने इस प्रक्रिया की वैधता को मजबूत करने की कोशिश करते हुए कहा कि पूरी कार्यवाही पार्टी के संविधान के अनुसार की गई है और विशेष सत्र का विवरण निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘यह असली या नकली होने का सवाल नहीं है। हम ही तृणमूल कांग्रेस हैं और आज के विशेष सत्र की कार्यवाही की जानकारी निर्वाचन आयोग को देंगे।’’

बनर्जी ने कहा, ‘‘हमने पार्टी के नियमों के अनुसार काम किया है और यह विशेष सत्र आहूत किया है। क्या सही है और क्या गलत, इसका फैसला निर्वाचन आयोग करेगा।’’

उन्होंने बताया कि नवगठित नेतृत्व जल्द ही विभिन्न स्तरों पर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे का गठन शुरू करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हम जल्द ही जिला समितियों, प्रदेश इकाई और प्रवक्ताओं के एक पैनल का गठन करेंगे।’’

हालांकि, बनर्जी ने ममता बनर्जी के प्रति नरम रुख अपनाते हुए कहा कि यदि वह चाहें तो बागी गुट की मुख्य सलाहकार बन सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यदि ममता बनर्जी मुख्य सलाहकार बनना चाहें, तो उनका स्वागत है।’’

यह विशेष सत्र पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी में उत्पन्न अभूतपूर्व संकट के बीच आयोजित किया गया।

कुछ ही दिन पहले पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने विपक्ष के नेता पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी के दावे का समर्थन किया था और पार्टी नेतृत्व की पसंद को खारिज कर दिया था। बागी गुट का दावा है कि इसके बाद उनकी संख्या और बढ़ गई है।

हाल ही में पार्टी को संसद में एक और झटका तब लगा जब उसके 28 में से 20 लोकसभा सदस्य कथित तौर पर तृणमूल संसदीय दल से अलग हो गए और उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया, साथ ही भाजपा-नेतृत्व वाले राजग को समर्थन देने की घोषणा की।

भाषा अमित माधव

माधव