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केरल उच्च न्यायालय ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

कोच्चि, 22 जून (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार की प्रियदर्शिनी योजना को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका सोमवार को खारिज कर दी। इस योजना के तहत महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों को केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) की साधारण बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है।

मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी एम की पीठ ने कहा कि यह योजना सरकार का एक नीतिगत फैसला है, जिसका मकसद कामकाजी महिलाओं को फायदा पहुंचाना है, और इसमें दखल देने का कोई आधार नहीं मिला।

यह याचिका मोहम्मद फिरदौस द्वारा दायर की गई, जिन्होंने खुद को जनहित में कार्य करने वाला नागरिक और करदाता बताया।

अपनी याचिका में फिरदौस ने तर्क दिया कि यह योजना भेदभावपूर्ण है और संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करती है, क्योंकि इसमें महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों के लिए बिना किसी आय सीमा या शर्त के मुफ़्त बस यात्रा की सुविधा दी गई है।

याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि इस योजना से सरकारी खजाने पर हर दिन लगभग दो करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा, जो सालाना करीब 800 करोड़ रुपये होगा।

जनहित याचिका में उस तरीके पर सवाल उठाए गए, जिससे इस नीति को मंज़ूरी दी गई और जिस तेज़ी से इसे लागू किया गया।

याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार ने कहा कि दिल्ली, पंजाब, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों में पहले से ही ऐसी योजनाएं लागू की जा रही हैं।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि इस योजना में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो किसी वैधानिक प्रावधान के विपरीत हो। इसके साथ ही अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।

प्रियदर्शिनी योजना, विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान यूडीएफ द्वारा किए गए पांच प्रमुख वादों में से एक थी। सत्ता में आने के बाद यूडीएफ सरकार ने यह योजना लागू की।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप