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भारत ने चीन, यूरोपीय संघ, अमेरिका से आयातित रसायन पर लगाया डंपिंग रोधी शुल्क

नयी दिल्ली, 22 जून (भाषा) भारत ने चीन, यूरोपीय संघ और अमेरिका से आयातित एक रसायन पर पांच साल के लिए डंपिंग रोधी शुल्क लगाया है।

इस रसायन का इस्तेमाल रबड़ और टायर उद्योग में होता है।

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, यह शुल्क वाणिज्य मंत्रालय की इकाई व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) की सिफारिश के बाद लगाया गया है। यह शुल्क 75 अमेरिकी डॉलर प्रति टन से 1,748 अमेरिकी डॉलर प्रति टन के बीच है।

डीजीटीआर की 19 जून की अधिसूचना में कहा गया, ‘‘ इस अधिसूचना के तहत लगाया गया डंपिंग रोधी शुल्क पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू रहेगा (जब तक कि इसे रद्द, प्रतिस्थापित या संशोधित न किया जाए)। ’’

महानिदेशालय ने तीनों क्षेत्रों से ‘सल्फेनामाइड्स एक्सेलेरेटर्स’ के आयात पर शुल्क की सिफारिश की है, क्योंकि इसे भारतीय बाजार में सामान्य मूल्य से कम दाम पर निर्यात किया गया। इससे डंपिंग हुई और घरेलू उद्योग को गंभीर नुकसान पहुंचा।

भारत ने चीन, मलेशिया, थाइलैंड और इंडोनेशिया से आयातित ‘एल्युमिनियम फॉयल’ पर डंपिंग रोधी शुल्क को भी बढ़ा दिया है।

राजस्व विभाग ने एक अलग अधिसूचना में कहा कि यह शुल्क इस वर्ष 15 दिसंबर तक लागू रहेगा।

एक अन्य अधिसूचना में विभाग ने कहा कि भारत ने चीन से आयातित ‘पॉलिएथिलीन टेरेफ्थेलेट रेजिन’ पर पांच वर्षों के लिए 200.66 अमेरिकी डॉलर प्रति टन का डंपिंग रोधी शुल्क लगाया है।

देशों द्वारा डंपिंग रोधी जांच यह पता लगाने के लिए की जाती है कि सस्ते आयात में वृद्धि के कारण घरेलू उद्योगों को नुकसान हुआ है या नहीं।

देश जिनेवा स्थित विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के बहुपक्षीय ढांचे के तहत प्रतिरोधात्मक उपाय के रूप में ऐसे शुल्क लगाते हैं। इस शुल्क का उद्देश्य निष्पक्ष व्यापार व्यवहार को सुनिश्चित करना और घरेलू उत्पादकों को विदेशी उत्पादकों तथा निर्यातकों के मुकाबले समान अवसर प्रदान करना है।

भाषा निहारिका अजय

अजय