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विहिप ने नीट परीक्षा केंद्रों पर 'सांप्रदायिक भेदभाव' का आरोप लगाया, जांच की मांग की

नयी दिल्ली, 21 जून (भाषा) विश्व हिंदू परिषद ने रविवार को दावा किया कि कई परीक्षा केंद्रों पर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-स्नातक (यूजी) 2026 देने वाले हिंदू अभ्यर्थियों को कलावा और माला जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने की इजाजत नहीं दी गई, जबकि मुस्लिम अभ्यर्थियों को हिजाब और बुर्का पहनने की अनुमति दी गई। संगठन ने इस कथित भेदभाव की जांच की मांग की।

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने आरोप लगाया कि अलग-अलग तरह का बर्ताव सांप्रदायिक भेदभाव के बराबर है और उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से इस मामले की जांच करने की मांग की।

बंसल ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'हम परीक्षा के सफल आयोजन के लिए एनटीए को बधाई देते हैं, लेकिन उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या हिंदू छात्रों के कलावा और साधारण मालाओं पर रोक थी, जबकि मुस्लिम लड़कियों को हिजाब और बुर्का पहनने की अनुमति थी।'

उन्होंने एनटीए से परीक्षा केंद्रों पर अपनाए जाने वाले पोशाक संबंधी नियमों के बारे में भी विस्तृत जानकारी मांगी।

प्रश्नपत्र लीक होने के कारण परीक्षा रद्द होने के बाद रविवार को 20 लाख से अधिक मेडिकल अभ्यर्थियों ने नीट की पुनर्परीक्षा दी।

भाषा

शुभम अविनाश

अविनाश