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पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति बढ़ाने से किया इनकार, दीपके ने कहा- प्रधान के इस्तीफे तक डटे रहेंगे

नयी दिल्ली, 20 जून (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने हाल में हुए प्रश्नपत्र लीक मामलों की जवाबदेही तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। पुलिस द्वारा प्रदर्शन स्थल खाली करने को कहे जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों का एक वर्ग निर्धारित समय के बाद भी वहां डटा रहा।

कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस से प्रदर्शन की अनुमति की अवधि बढ़ाने का अनुरोध करते हुए कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफा देने तक वह प्रदर्शन स्थल पर डटे रहेंगे।

पुलिस के अनुसार, अपराह्न करीब एक बजे शुरू हुए इस प्रदर्शन की अनुमति केवल शाम पांच बजे तक थी।

दीपके ने प्रदर्शन के दौरान एक बार फिर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। इस दौरान उनके साथ जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हुए। वांगचुक ने घोषणा की कि यदि मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं तो वह 27 जून से अनशन शुरू करेंगे।

भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने दीपके के आह्वान पर ‘‘थाली और चम्मच’’ बजाकर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान पूरा प्रदर्शन स्थल 'धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो' के नारों से गूंज उठा।

दीपके ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने पर भीड़ के जोरदार स्वागत के बीच कहा, ‘‘अगर थाली बजाने से कोरोना को भगाया जा सकता है, तो थाली बजाकर धर्मेंद्र प्रधान को भी भगाया जा सकता है।’’

प्रदर्शन की अनुमति समाप्त होने से एक घंटा पहले, दीपके ने भीड़ से पूछा कि क्या वे प्रदर्शन समाप्त करना चाहते हैं या ‘‘धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक’’ इसे जारी रखना चाहते हैं।

इस पर बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन जारी रखने के समर्थन में प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद दीपके ने घोषणा की कि वे स्थल पर डटे रहेंगे और दिल्ली पुलिस से अनुमति की अवधि बढ़ाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से अनुरोध करता हूं कि देशभर से युवा यहां आए हैं और वे धरना जारी रखना चाहते हैं। यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा है। हम दिल्ली पुलिस से हमारी अनुमति बढ़ाने का अनुरोध करते हैं।’’

हालांकि, पुलिस ने प्रदर्शन जारी रखने की अनुमति देने से इनकार कर दिया और कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार शाम पांच बजे के बाद प्रदर्शन जारी नहीं रखा जा सकता। शाम पांच बजे के बाद पुलिस ने घोषणा की कि निर्धारित समय समाप्त होने के बाद यह प्रदर्शन ‘‘अवैध’’ है।

इसके कुछ ही देर बाद ‘‘जय भीम’’ और ‘‘भारत माता की जय’’ के नारे लगाते हुए कई प्रदर्शनकारियों ने उस मंच के चारों ओर घेरा बना लिया, जहां दीपके और अन्य लोग मौजूद थे।

इस बीच, कुछ प्रदर्शनकारी वहां से जाने लगे, जबकि बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस के कर्मी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने लगे।

परीक्षा में कथित गड़बड़ियों, बार-बार पेपर लीक होने और सरकार से जवाबदेही की मांग को लेकर कॉजपा ने जंतर-मंतर पर दूसरी बार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन रविवार को होने वाली नीट-यूजी की दोबारा होने वाली परीक्षा से एक दिन पहले हुआ।

इससे पहले, दीपके ने कहा कि केंद्र के साथ बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन सिर्फ इस शर्त पर कि शिक्षा मंत्री इस्तीफ़ा दें।

उन्होंने प्रदर्शनकारियों से कहा, 'अगर गिरफ्तारियां होती हैं, तो गिरफ्तारी देने वाला पहला व्यक्ति मैं ही होऊंगा।'

दीपके ने सांप्रदायिक राजनीति पर भी कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘क्या हिंदू-मुस्लिम की राजनीति से आपको कोई फायदा हुआ है? क्या इससे प्रश्नपत्र लीक रुक गए हैं? आपको क्या मिल रहा है? इसका फायदा केवल एक राजनीतिक दल को हो रहा है।’’

इस बीच, वांगचुक ने घोषणा की कि यदि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वह 27 जून से अनशन शुरू करेंगे।

वांगचुक ने कहा, ‘‘सिर्फ थाली बजाने से कोई समाधान नहीं निकलेगा। जब मैं अनशन पर बैठूंगा, तो मुझे उम्मीद है कि आप मेरे साथ खड़े होंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम एक ऐसे मंत्री से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, जिनसे स्पष्ट रूप से गलतियां हुई हैं। जवाबदेही तय होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर सामूहिक इस्तीफे भी होने चाहिए।’’

शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता वांगचुक ने कहा, ‘‘झूठ से पैदा होने वाला खतरा चीन या पाकिस्तान से खतरे से भी बड़ा है। हमें खुद को झूठ और भय से बचाना होगा।’’

नाम ने छापने की शर्त पर लोकनीति के क्षेत्र से जुड़े एक युवा पेशेवर ने कहा कि ऐसे आंदोलनों में शामिल होना महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस आंदोलन की शुरुआत किसी संगठित मंच से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया से हुई थी। यह स्वाभाविक था, इसलिए लोग इससे जुड़ पाए।’’

इस भावना से सहमति जताते हुए कई प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि उन्हें आंदोलन की भविष्य की दिशा को लेकर निश्चित जानकारी नहीं है। हालांकि, उनका कहना था कि वे इसमें इसलिए शामिल हुए, क्योंकि किसी न किसी रूप में सामूहिक लामबंदी आवश्यक हो गई थी।

प्रदर्शन में समर्थकों ने कॉकरोच के मुखौटे पहने और पोस्टर पकड़ रखे थे। इनमें कुछ पर लिखा था, ‘‘बहरों को सुनाने के लिये बहुत तेज आवाज की जरूरत होती है’’ और ‘‘केंद्रीय शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करो।’’

प्रदर्शन में मौजूद दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता दिलशाद चौधरी ने कहा कि बार-बार सामने आने वाले प्रश्नपत्र लीक के विवाद जनता के गुस्से की सीमा पार कर चुके हैं।

चौधरी ने कहा, ‘‘शिक्षा व्यवस्था वर्षों से चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन बार-बार होने वाले प्रश्नपत्र लीक इस गुस्से का कारण बने। ऐसे लोगों का समर्थन करना जरूरी है, जो इन विरोध प्रदर्शनों के लिए मंच उपलब्ध करा रहे हैं। हमें बदलाव चाहिए।’’

नीट की तैयारी कर रहे एक अभ्यर्थी ने कहा कि प्रदर्शनकारी तत्काल परिणाम की उम्मीद नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनका मानना है कि अपनी आवाज बुलंद करना जरूरी है।

अभ्यर्थी ने कहा, ‘‘हर लड़ाई जीतने के लिए नहीं लड़ी जाती, कुछ लड़ाइयां इसलिए लड़ी जाती हैं, ताकि सभी को पता चले कि कोई वहां मौजूद था।’’

उसने कहा, ‘‘यहां जुटे लोग किसी राजनीतिक कारण से नहीं आए हैं। ये वे लोग हैं जो निराश हैं और जवाब चाहते हैं।’’

प्रदर्शन से पहले दीपके ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक खुला पत्र लिखकर छात्रों द्वारा उठाई गई चिंताओं को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की थी।

इससे पहले कॉजपा ने छह जून को भी इसी मुद्दे पर जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन किया था।

भाषा

राखी दिलीप

दिलीप