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मदरसा में नाबालिग से यौन उत्पीड़न के आरोपी मौलवी की जमानत केरल उच्च न्यायालय ने खारिज की

कोच्चि, 20 जून (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने एक मदरसे में आठ साल की छात्रा के यौन उत्पीड़न के आरोपी 63-वर्षीय मौलवी को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा है कि यह ‘‘पूर्व नियोजित आपराधिक कृत्य’’ प्रतीत होता है।

न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा, ‘‘यह एक ऐसा मामला है, जहां एक मस्जिद के 63-वर्षीय मौलवी पर आठ साल की छात्रा का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है।'

अभियोजन पक्ष के अनुसार, ‘‘अपराध की प्रकृति, अपराध की गंभीरता, इसमें आवेदक की संलिप्तता और ऊपर वर्णित तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए मेरा मत है कि आवेदक को इस चरण में जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता है।’’

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी ने नाबालिग लड़की के निजी अंगों को उस समय जबर्दस्ती स्पर्श किया था, जब वह मदरसे में पढ़ रही थी।

आरोपी इस साल आठ फरवरी से न्यायिक हिरासत में है।

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012, भारतीय न्याय संहिता, 2023 और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

आरोपी ने यह दावा करते हुए जमानत मांगी थी कि उसे फंसाया गया है और उसे कथित अपराध से जोड़ने वाली कोई सामग्री मौजूद नहीं है।

अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा, ‘‘केस डायरी के अवलोकन से पता चलता है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप बेहद गंभीर हैं, और यह प्रथम दृष्टया पूर्व नियोजित आपराधिक कृत्य को दर्शाता है।’’

भाषा सुरेश अविनाश

अविनाश