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बिहार : भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ की न्यायिक जांच के आदेश

पटना, 20 जून (भाषा) बिहार सरकार ने भोजपुर जिले में हाल ही में हुई पुलिस मुठभेड़ की न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौती गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की बुधवार को पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई थी।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘बिलौती गांव में बुधवार को हुई मुठभेड़ की स्वतंत्र न्यायिक जांच उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में कराई जाएगी।’’

उन्होंने कहा कि न्यायिक जांच से घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ गहन पड़ताल सुनिश्चित होगी।

इस बीच, बिहार पुलिस ने इस मामले में एक थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई एक कथित वीडियो सामने आने के बाद की गई, जिसमें एक हथियारबंद व्यक्ति पुलिस बल की ओर पिस्तौल ताने हुए दिखाई दे रहा है और पुलिसकर्मियों पर समय पर प्रतिक्रिया न देने के आरोप लगाए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, बुधवार को बिलौती गांव में एक अभियान के दौरान तिवारी ने पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी की, जिसके बाद आत्मरक्षा और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जवाबी कार्रवाई की गई। गोली लगने से घायल तिवारी की पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई।

पुलिस के प्रारंभिक बयान में तिवारी को ‘मानसिक रूप से अस्वस्थ’ बताया गया था। हालांकि, उनके परिजनों और अन्य लोगों का कहना है कि वह एक सामाजिक कार्यकर्ता थे और स्थानीय समस्याओं को प्रशासन के समक्ष लगातार उठाते रहते थे।

सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कथित वीडियो में मुठभेड़ से पहले तिवारी को अपना हथियार फेंकते हुए देखा जा सकता है। ‘पीटीआई-भाषा’ हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है।

वहीं, पुलिस के बयान में दावा किया गया है कि तिवारी लगातार पुलिस पर गोली चला रहे थे, जिसके चलते जवाबी कार्रवाई में उनके पैर में गोली लगी।

उल्लेखनीय है कि इस घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मंत्री मिथिलेश तिवारी, बक्सर के भाजपा विधायक आनंद मिश्रा और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भी सवाल उठाए हैं।

भाषा

कैलाश रवि कांत