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लद्दाख के संगठनों ने केंद्र के साथ विश्वास की कमी का हवाला देते हुए बंद का आह्वान किया

लेह, 20 जून (भाषा) ‘लेह एपेक्स बॉडी’ (एलएबी) और ‘कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस’ (केडीए) ने शनिवार को केंद्र पर पिछले महीने लद्दाख के राजनीतिक और संवैधानिक भविष्य पर हुई बैठक में लिए गए अहम निर्णयों को उस बैठक के कार्य विवरण में शामिल नहीं करने का आरोप लगाते हुए 23 जून को केंद्रशासित प्रदेश में बंद का आह्वान किया।

एलएबी के सह-अध्यक्ष शेरिंग दोरजे ने यहां एक संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि 22 मई को गृह मंत्रालय की अगुवाई वाली एक उप-समिति की बैठक में लद्दाख के लिए एक प्रस्तावित लोकतांत्रिक ढांचे एवं संवैधानिक सुरक्षा उपायों पर चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि इस ढांचे में विधायी, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां शामिल हैं, जबकि संवैधानिक सुरक्षा मानकों को प्रस्तावित अनुच्छेद 371के के माध्यम से संविधान में शामिल किया जा सकता है।

दोरजे ने कहा कि बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी थी कि मुख्य सचिव समेत पूरी नौकरशाही, लद्दाख के लोगों के नेतृत्व वाली कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में काम करेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘उस बैठक में कुछ निर्णय लिए गए थे, लेकिन बैठक के विवरण में उन्हें ठीक से दर्ज नहीं किया गया।’’

आंदोलन कर रहे दो समूहों के शीर्ष नेताओं ने प्रेस वार्ता में लद्दाख के सांसद हनीफ़ा जान की उपस्थिति में कहा कि बैठक के आधिकारिक कार्य विवरण में में अहम फैसलों को शामिल न करने से विश्वास की कमी और बढ़ी है, फलस्वरूप इससे उन्हें राज्य का दर्जा और इलाके के लिए छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा उपायों की अपनी पुरानी मांगों पर लौटने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

केंद्र पर ‘टालमटोल की रणनीति’ अपनाने का आरोप लगाते हुए दोरजे ने कहा कि सरकार शायद यह मान रही है कि दलाई लामा के लद्दाख आने की वजह से स्थानीय लोग चुप रहेंगे और कोई कदम नहीं उठाएंगे।

उन्होंने 23 जून को पूरे लद्दाख में बंद की घोषणा करते हुए कहा, “विरोध करने के कई तरीके हैं और ऐसे विरोध प्रदर्शन ज़रूरी नहीं कि लेह में ही हों।”

उन्होंने कहा कि हालांकि पर्यटकों के मौसम को देखते हुए परिवहन सेवाएं चालू रहेंगी।

उन्होंने बताया कि उसी दिन लेह में एक बड़ी जनसभा भी की जाएगी।

भाषा राजकुमार माधव

माधव