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महाराष्ट्र ने गढ़चिरौली की छह लौह अयस्क खदानें एमएसएमसी को देने का केंद्र से किया अनुरोध

मुंबई, 18 जून (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने गढ़चिरौली में स्थित छह लौह अयस्क खदानों को महाराष्ट्र राज्य खनन निगम (एमएसएमसी) को आवंटित करने का बृहस्पतिवार को अनुरोध किया। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी के साथ बैठक के दौरान यह मांग रखी।

उन्होंने कहा कि इससे राज्य को ‘ग्रीन स्टील हब’ (हरित इस्पात केंद्र) में बदलने में मदद मिलेगी।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय खनन राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे, महाराष्ट्र के खनन राज्यमंत्री पंकज भोयर और केंद्र एवं राज्य के वरिष्ठ अधिकारी इस बैठक में उपस्थित रहे।

फडणवीस ने कहा, ‘‘ यदि ये खदानें राज्य निगम को आवंटित की जाती हैं, तो इन्हें दो वर्षों के भीतर चालू किया जा सकता है। वहीं 2030 तक उत्पादन शुरू हो सकता है। इससे भारत एक इस्पात निर्यातक देश के रूप में उभरने में मदद मिलेगी।’’

उन्होंने कहा कि पूर्वी महाराष्ट्र का गढ़चिरौली क्षेत्र देश के उच्चतम गुणवत्ता वाले लौह अयस्क भंडार में से एक है। इसमें प्रमुख औद्योगिक एवं इस्पात निर्माण केंद्र बनने की क्षमता है। साथ ही यह लगभग तीन लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित कर सकता है और लाखों रोजगार उत्पन्न कर सकता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस जिले में लौह अयस्क के साथ-साथ चूना पत्थर और इस्पात उत्पादन के लिए आवश्यक अन्य खनिज भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा, गढ़चिरौली में वामपंथी उग्रवाद में कमी आने से औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण बना है।

फडणवीस ने बताया कि महाराष्ट्र में 40 से अधिक खनिज ब्लॉक नीलामी के लिए तैयार हैं और 34 चिन्हित ब्लॉक में से 14 के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राज्य ने 2030 तक पांच करोड़ टन लौह अयस्क उत्पादन का लक्ष्य रखा है।

बयान के अनुसार, रेड्डी ने इस मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और कोयला गुणवत्ता से जुड़े विवादों को कम करने तथा बिजली उत्पादन कंपनियों को वित्तीय नुकसान से बचाने के लिए एक स्वचालित नमूना परीक्षण प्रणाली शुरू करने का निर्देश दिया।

भाषा निहारिका अजय

अजय