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विकास के अवसरों के जरिए टिकाऊ जनसांख्यिकीय बदलाव हासिल किया गया: भारतीय राजदूत

(हरिंदर मिश्रा)

तेल अवीव, 18 जून (भाषा) भारत ने कहा है कि उसने जनसंख्या स्थिरीकरण के लक्ष्य को अधिकार-आधारित, स्वैच्छिक और विकास-उन्मुख दृष्टिकोण के माध्यम से आगे बढ़ाया है।

इजराइल में भारत के राजदूत जे पी सिंह ने बुधवार को तेल अवीव यूनिवर्सिटी में ‘‘अंतरराष्ट्रीय जनसांख्यिकीय रुझान और सार्वजनिक नीति’’ पर आयोजित एक सामूहिक परिचर्चा के दौरान ये बातें कहीं।

सिंह ने कहा कि भारत की रणनीति में आबादी को स्थिर करने के राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ-साथ परिवार नियोजन के निजी फैसलों को ध्यान रखा गया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रजनन से जुड़े फैसले पूरी जानकारी और अच्छी गुणवत्ता वाली सेवाओं तक पहुंच के आधार पर लिए जाएं।

उन्होंने कहा, ‘‘इस दृष्टिकोण को स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा, महिलाओं के सशक्तिकरण और परिवार नियोजन तक बेहतर पहुंच में निवेश से समर्थन मिला है।’’

सिंह ने कहा, ‘‘भारत, जहां लगभग 1.4 अरब लोग रहते हैं और जो दुनिया की आबादी का करीब 17 प्रतिशत है, उसने जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए लोकतांत्रिक रास्ता अपनाया है।’’

राष्ट्रीय जनसंख्या नीति (2000) का जिक्र करते हुए, भारतीय राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि यह नीति स्वैच्छिक और सुविचारित चयन, प्रजनन अधिकारों, मां और बच्चे की सेहत और सामाजिक विकास पर केंद्रित है।

उन्होंने कहा कि ‘‘भारत का अनुभव यह दिखाता है कि टिकाऊ जनसंख्या बदलाव जबरदस्ती के उपायों के बजाय विकास और बेहतर मौकों के जरिए हासिल किया जाता है।’’

भारतीय राजदूत ने मां और बच्चे की सेहत, परिवार नियोजन, टीकाकरण, पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और महिलाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्रों में हुई अहम प्रगति पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘मां और नवजात शिशु की सेहत से जुड़े नतीजों में लगातार सुधार हो रहा है। गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव-पूर्व देखभाल का दायरा 2020-21 में 92.6 प्रतिशत था, जो 2023-24 में बढ़कर 95.9 प्रतिशत हो गया, संस्थागत प्रसव 88.6 प्रतिशत से बढ़कर 90.6 प्रतिशत हो गए हैं, और कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में होने वाले प्रसव 91.3 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं।’’

भाषा आशीष मनीषा

मनीषा