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घरेलू एल्युमीनियम आधारित विनिर्माण के विकास के लिए शुल्क ढांचे में सुधार जरूरी : जीटीआरआई

नयी दिल्ली, 18 जून (भाषा) घरेलू एल्युमीनियम आधारित विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार को कच्चे एल्युमीनियम के आयात पर लगने वाले शुल्क को हटाने, असंतुलित शुल्क ढांचे को दुरुस्त करने तथा इस धातु के निर्यात पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने जैसे कदमों पर विचार करना चाहिए। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने बृहस्पतिवार को यह बात कही।

जीटीआरआई ने कहा कि भारत की वर्तमान शुल्क नीतियों ने एल्युमीनियम मूल्य श्रृंखला में कई प्रकार की विकृतियां पैदा कर दी हैं। इससे एक ओर धातु के निर्यात को प्रोत्साहन मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर विनिर्माताओं के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ रही है और तैयार उत्पादों के आयात पर निर्भरता भी बढ़ रही है।

एल्युमीनियम आधुनिक औद्योगिक अर्थव्यवस्था की आधारभूत धातुओं में से एक है। इसका उपयोग बिजली पारेषण, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, रेलवे, निर्माण, पैकेजिंग, वैमानिकी, रक्षा तथा विभिन्न उपभोक्ता एवं इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्माण में व्यापक रूप से किया जाता है।

जीटीआरआई ने कहा कि भारत में बुनियादी ढांचा, स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और इलेक्ट्रिक परिवहन क्षेत्रों में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में एल्युमीनियम और एल्युमीनियम आधारित उत्पादों की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

इसने कहा कि अगर शुल्क ढांचे में आवश्यक सुधार किए जाएं तो घरेलू उद्योग को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।

भारत इस मौके का फ़ायदा उठाने की अच्छी स्थिति में है यहां संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।

हालांकि, जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत अपने एल्युमीनियम संसाधनों का पूरा आर्थिक लाभ नहीं उठा पा रहा है।

भाषा यासिर अजय

अजय