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महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा चुनावी वादे की पूर्ति : केरल उच्च न्यायालय

कोच्चि, 18 जून (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को साधारण केएसआरटीसी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने वाली यूडीएफ सरकार की नई ‘प्रियदर्शिनी योजना’ उसके चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी. एम की पीठ ने यह भी कहा कि यह सरकार का एक नीतिगत निर्णय है जो कामकाजी वर्ग की महिलाओं के हित में लिया गया है।

खुद को एक उत्साही नागरिक और करदाता बताने वाले मुहम्मद फ़िरदौस की जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, 'कम से कम उन्होंने अपना वादा (चुनाव के दौरान किया गया) तो पूरा किया है।’’

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील शमीम अहमद एम पी ने पीठ को बताया कि यह योजना 'भेदभावपूर्ण' है और संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन है क्योंकि यह महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को बिना किसी आय सीमा, आवासीय योग्यता या उस चिन्हित नफे- नुकसान के आकलन के बिना मुफ्त बस यात्रा प्रदान करती है जिसका वह समाधान करना चाहती है।

वहीं सरकार ने अदालत को बताया कि दिल्ली, पंजाब, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में भी ऐसी ही योजनाएं लागू की गई हैं।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दावा किया है कि इस योजना से सरकारी खजाने पर प्रतिदिन लगभग दो करोड़ रुपये या सालाना लगभग 800 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

जनहित याचिका में नीति को मंजूरी देने की गति पर भी सवाल उठाया गया है।

भाषा तान्या नरेश

नरेश