Breaking News

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया     |   नकल माफिया सपा-कांग्रेस की देन: सीएम योगी     |   पटना में छात्रों का प्रोटेस्ट: तेज प्रताप को पटना पुलिस ने हिरासत में लिया     |   'पहले शिक्षा मंत्री को हटाओ, फिर होगी बात', राहुल गांधी ने मोदी सरकार को दिया अल्टीमेटम     |   क्या मुझे चरित्र प्रमाण पत्र लेने की जरूरत है कि मेरा उपवास पवित्र था: वांगचुक     |  

लोककथाओं और प्रकृति पर आधारित गोंड कला की झलक पेश करने वाली प्रदर्शनी का आयोजन

नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में स्थित आदिवासी गांव पाटनगढ़ के 21 गोंड प्रधान कलाकारों की ओर से चटख रंगों की बारीक रेखाओं, बिंदुओं और जटिल पैटर्न से बनाई गई मनमोहक कलाकृतियां राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित प्रदर्शनी में प्रदर्शित की जा रही हैं, जो प्रकृति और पौराणिक कथाओं पर आधारित आदिवासी कहानियों की जीवंत झलक पेश करती हैं।

सजा फाउंडेशन की ओर से ‘इंडिया इंटरनेशनल सेंटर’ में आयोजित ‘पाटनगढ़ के गोंड प्रधान’ प्रदर्शनी महान कलाकार जंगढ़ सिंह श्याम को समर्पित है, जिनकी “जंगढ़ कलम” शैली समकालीन गोंड कला की पहचान बन गई है।

प्रदर्शनी में सुनील टेकम, सुनीता धुर्वे, तमसीराम परस्ते, राजेश श्याम, चंपी श्याम, रोशन धुर्वे, संतोष श्याम, विजय उइके और राम कुमार श्याम सहित अन्य कलाकारों की कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जा रहा है, जो जंगढ़ सिंह श्याम की कलात्मक दृष्टि की स्थायी विरासत पर प्रकाश डालती हैं।

रजा फाउंडेशन के प्रबंध न्यासी और कवि अशोक वाजपेयी ने कहा कि जंगढ़ सिंह श्याम क्षेत्र की लोक-कथाओं से काफी प्रेरणा लेने के लिए जाने जाते हैं-वह “संगीत से जुड़ी यादों, गीतों और कहानियों को दृश्य-चित्रों में बदलते हैं”-और यह एक ऐसी परंपरा है, जिसे बाद के गोंड प्रधान कलाकार भी अपनाते हैं।

वाजपेयी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “वे (कलाकार) सभी गोंड प्रधान समुदाय से हैं, जो गोंड समुदाय का ही एक हिस्सा है। वे पारंपरिक रूप से समुदाय के गायक थे और वंशावली, दुनिया की उत्पत्ति वगैरह के बारे में गाते थे। जंगढ़ सिंह श्याम, जो गायक और चित्रकार दोनों थे, ने अपनी संगीत से जुड़ी यादों और तस्वीरों को दृश्य-चित्रों में बदलना शुरू किया। और इस तरह ‘जंगढ़ कलम’ की शुरुआत हुई।”

आयोजकों के मुताबिक, यह प्रदर्शनी 26 जून तक आयोजित की जाएगी।

भाषा पारुल पवनेश

पवनेश