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सार्वजनिक बैंकों का हरित जमा 2025-26 में तेजी से बढ़ा

मुंबई, 16 जून (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान हरित जमा जुटाने में तेज वृद्धि दर्ज की जो जमाकर्ताओं में बढ़ती जागरूकता और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हरित जमा ढांचे के परिपक्व होने का संकेत है।

हरित जमा वह बैंक जमा है जिसका इस्तेमाल नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन और जल संरक्षण जैसी पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं के वित्तपोषण में किया जाता है।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वार्षिक रिपोर्ट (2025-26) के 'पीटीआई-भाषा' द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चला है कि आठ सरकारी बैंकों ने आलोच्य अवधि में 3,733.11 करोड़ रुपये के हरित जमा जुटाए, जो एक साल पहले के 1,831.79 करोड़ रुपये का दोगुना से भी अधिक है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हरित जमा में यह बढ़ोतरी बैंकों और जमाकर्ताओं के बीच टिकाऊ वित्त की तरफ बढ़ते रुझान को दर्शाती है, जहां बैंक अपनी देनदारियों को पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं में ऋण वितरण से जोड़ रहे हैं।

देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने मार्च, 2026 तक 317.39 करोड़ रुपये के हरित जमा जुटाए, जबकि इसका बकाया ग्रीन जमा 218 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष में बैंक ने 189.08 करोड़ रुपये जुटाए, जिसे पूरी तरह स्वच्छ परिवहन, खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के वित्तपोषण में लगाया गया।

वहीं, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 2025-26 में 1,164.44 करोड़ रुपये जुटाए, जो 2024-25 के 1,083.09 करोड़ रुपये से अधिक है। बैंक ने अपनी समूची हरित जमा राशि नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ परिवहन क्षेत्रों में लगाई।

सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य बैंकों ने भी अपनी हरित जमाओं से मिली राशि का उपयोग मुख्य रूप से नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, सौर ऊर्जा पहल और स्वच्छ परिवहन में किया है।

आरबीआई ने 11 अप्रैल, 2023 को हरित जमा स्वीकार करने के लिए एक ढांचा जारी किया था, जो एक जून, 2023 से प्रभावी हुआ था। इस ढांचे के तहत बैंक हरित जमा जुटाकर उसे नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन, जल प्रबंधन, जलवायु अनुकूलन और अन्य पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं में निवेश कर सकते हैं।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय