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ईडी ने उत्तराखंड के एससी-एसटी छात्रवृत्ति ‘घोटाले’ में 47 प्रतिशत अयोग्य लाभार्थियों की पहचान की

नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) उत्तराखंड में अनुसूचित जाति/जनजाति छात्रों की छात्रवृत्ति में कथित घोटाले की जांच में पता चला कि लगभग 47 प्रतिशत लाभार्थी या तो परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो गए थे, या अनुपस्थित रहे, या उनका पता नहीं चल सका, या फिर तय पात्रता शर्तों को पूरा न करने के बावजूद उन्हें विशेष अनुदान मिलता रहा। प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार को यह जानकारी दी।

केंद्रीय एजेंसी 2020 से धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत इस मामले की जांच कर रही है।

इसने उत्तराखंड पुलिस द्वारा दर्ज उस प्राथमिकी का संज्ञान लिया, जो 2011-12 से 2016-17 के दौरान अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों के लिए मैट्रिक के बाद दी जाने वाली छात्रवृत्ति को “धोखाधड़ी” से हासिल करने और उसका दुरुपयोग करने से संबंधित थी।

एजेंसी ने एक बयान में कहा कि जांच के तहत उसने हरिद्वार और रुड़की में 13.83 करोड़ रुपये की संपत्ति—जैसे सावधि जमा, भूखंड और शैक्षणिक/संस्थागत इमारतें—कुर्क करने का छठा आदेश जारी किया।

एजेंसी ने कहा, “ईडी की जांच में एक सुनियोजित तरीका सामने आया, जिसके तहत ऐसे छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति के दावे किए गए थे, जो या तो असल में नामित ही नहीं थे, कक्षा में नहीं आते थे, पढ़ाई-लिखाई के लिहाज से पात्र नहीं थे, या फिर लागू योजना के तहत छात्रवृत्ति का फायदा पाने के हकदार नहीं थे।”

जांच में पाया गया कि छात्रवृत्ति के 6,208 दावों में से 2,895 (46.63 प्रतिशत) फर्जी थे।

एजेंसी ने कहा कि इस “धोखाधड़ी” के कारण राज्य सरकार को नुकसान हुआ और आरोपी व्यक्तियों व उनसे जुड़ी संस्थाओं को गैर-कानूनी फायदा हुआ।

भाषा प्रशांत दिलीप

दिलीप