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एनसीपीआई के वरिष्ठ पदाधिकारी ने तृणमूल के बागी सांसदों के पार्टी में विलय पर उठाए सवाल

कोलकाता, 15 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों द्वारा ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) में अपने विलय की घोषणा किए जाने के एक दिन बाद, इस पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।

पदाधिकारी ने दावा किया कि इस कदम को लेकर पार्टी नेतृत्व से कभी कोई परामर्श नहीं किया गया था और ऐसा निर्णय एकतरफा नहीं लिया जा सकता है।

एनसीपीआई के राष्ट्रीय सचिव शांतनु डे ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष ने अन्य पदाधिकारियों के साथ विलय के किसी भी प्रस्ताव पर चर्चा नहीं की थी।

उन्होंने संकेत दिया कि इस फैसले को संगठनात्मक मंजूरी नहीं मिली थी।

उन्होंने टेलीविजन चैनलों को बताया, 'पार्टी अध्यक्ष ने पार्टी के भीतर विलय के बारे में कभी कोई बात नहीं की। ऐसे फैसले वह अकेले नहीं ले सकते।'

उनका यह बयान संगठन के भीतर संभावित मतभेदों को दर्शाता है, जो कि इस नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम के बाद पैदा हुए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने इस गुमनाम सी पार्टी को अचानक राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया है।

शांतनु ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी की राजनीतिक गतिविधियां मुख्य रूप से त्रिपुरा तक ही सीमित थीं और पश्चिम बंगाल में वह कभी भी सक्रिय नहीं रही है।

उन्होंने कहा, 'हालांकि इस पार्टी का पंजीकरण 2023 में पश्चिम बंगाल में हुआ था, लेकिन यह राज्य कभी भी हमारे प्रमुख कार्यक्षेत्रों में शामिल नहीं रहा।'

उनका यह बयान तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को समर्थन देने के साथ ही एनसीपीआई में अपने विलय की घोषणा की थी।

डे की इन ताजा टिप्पणियों ने हालांकि विलय की प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं, और यह एनसीपीआई के रास्ते एक अलग राजनीतिक पहचान बनाने के बागी सांसदों के प्रयास को और पेचीदा बना सकता है।

तृणमूल के बागी सांसदों ने सीधे भाजपा में शामिल होने के बजाय इस कम प्रसिद्ध पार्टी का विकल्प चुना था। राजनीतिक विश्लेषक इस कदम को एक ऐसी रणनीति के रूप में देख रहे थे, जिसका उद्देश्य भाजपा के साथ औपचारिक विलय की राजनीतिक जटिलताओं से बचते हुए, संसद में एक अलग गुट के रूप में मान्यता प्राप्त करना था।

भाषा

प्रचेता दिलीप

दिलीप