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कांग्रेस को राष्ट्रवादियों से दिक्कत है, चरमपंथी तत्वों से नहीं: भाजपा ने सतीशन की टिप्पणी पर कहा

नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह में हिस्सा लेने वाले तीन कुलपतियों की आलोचना करने पर केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन पर सोमवार को जम कर हमला बोला और कांग्रेस पर पाखंड और दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह को सरसंघचालक मोहन भागवत ने संबोधित किया था।

दरअसल सतीशन ने शनिवार को तिरुवनंतपुरम में आयोजित आरएसएस के शताब्दी कार्यक्रम में केरल विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय और मलयालम विश्वविद्यालय के कुलपतियों की भागीदारी की आलोचना की थी और इन कुलपतियों से केरल की जनता से माफी मांगने को कहा था।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस ने एक ‘‘राष्ट्रवादी संगठन’’ के कार्यक्रम में कुलपतियों के शामिल होने पर आपत्ति जताई है जबकि वह मुस्लिम लीग, जमात और एसडीपीआई जैसे संगठनों का सहयोग लगातार ले रही है।

पूनावाला ने एक वीडियो बयान में कहा, ‘‘ यह पाखंड की हद है। कांग्रेस को इस बात से दिक्कत है कि तीन कुलपति एक राष्ट्रवादी संगठन के कार्यक्रम में शामिल हुए। जबकि वह मुस्लिम लीग, जमात और एसडीपीआई का समर्थन लेती है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि केरल में मुस्लिम लीग के 'पूरी तरह नियंत्रण' वाली कांग्रेस को कट्टरपंथी सोच वाले समूहों और लोगों से कोई दिक्कत नहीं है लेकिन वह राष्ट्रवादी संगठनों को निशाना बनाती है।

भाजपा नेता ने कहा, ‘‘ उन्हें राष्ट्रवादियों से दिक्कत है लेकिन उन्हें ऐसे लोगों को मंच देने में कोई परेशानी नहीं है जो इस्लामिक रिपब्लिक चाहते हैं या जो नक्सलियों को शहीद कहते हैं... ऐसे लोगों की तारीफ़ की जाती है और राष्ट्रवादियों को तरह-तरह की धमकियां दी जाती हैं।’’

पूनावाला ने कहा कि आरएसएस से जुड़े कार्यक्रमों में कुलपतियों के शामिल होने पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकारों ने पहले सरकारी कर्मचारियों को आरएसएस के कार्यक्रमों और शाखाओं में शामिल होने से रोकने की कोशिश की थी।

उन्होंने कहा, ‘‘किसी भी कुलपति पर आरएसएस से जुड़े किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने पर कोई रोक या पाबंदी नहीं है।’’

उन्होंने दावा किया कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने ऐसी पाबंदियां हटा दी हैं और कहा है कि आरएसएस देश के सर्वाधिक राष्ट्रवादी संगठनों में से एक है।

उन्होंने कहा ‘‘ यह स्पष्ट है कि कांग्रेस का मकसद राष्ट्रवादियों को दबाना और इस्लामी व कट्टरपंथी तत्वों को मंच देना है।’’

सतीशन ने एक दिन पहले ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था कि आरएसएस के कार्यक्रम में कुलपतियों का शामिल होना एक ‘‘गंभीर गलती’’ है और यह केरल की शैक्षिक परंपरा और उनके पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘केरल के लोग कुलपति के पद का बहुत सम्मान करते हैं। ऐसे आरएसएस नेता के कार्यक्रम में शामिल होकर, जो कट्टर सांप्रदायिकता का प्रचार करते हैं, उन्होंने उस सम्मान को कम किया है।’’

सतीशन ने कहा कि सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने वाला कोई भी काम मंज़ूर नहीं है, चाहे वह कोई भी करे।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने वाले तीनों कुलपतियों को केरल की जनता से माफ़ी मांगनी चाहिए।

भाषा शोभना मनीषा

मनीषा