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पश्चिम एशिया पर भारतीय नीति में संतुलन राष्ट्रीय हित के लिए जरूरी : कांग्रेस

नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) कांग्रेस ने अमेरिका और ईरान के बीच समझौते पर सहमति बन जाने का स्वागत करते हुए सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया को लेकर भारत की नीति में संतुलन का होना राष्ट्रीय हित में है, लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार ऐसा करने में अब तक विफल रही है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से यह उम्मीद करना बहुत ज्यादा होगा कि वे इजराइल के प्रति 'अपनी अंधभक्ति और बिना शर्त समर्थन' पर पुनर्विचार करेंगे।

अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिन तक जारी रहे युद्ध को समाप्त करने व होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति बन गई है और दोनों देशों के बीच समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे।

रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, 'यह खबर स्वागतयोग्य है कि अमेरिका और ईरान 19 जून को जिनेवा में पश्चिम एशिया में शत्रुता रोकने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, भले ही पूरी जानकारी अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है।'

उन्होंने कहा कि सबको उम्मीद है कि दोनों देश और साथ ही इजराइल भी इस समझौते का पालन करेंगे तथा यह समझौता आगे चलकर अधिक स्थायी समाधान का रास्ता खोलेगा।

उन्होंने कहा, 'होर्मुज जलडमरूमध्य के बिना किसी प्रतिबंध के, फिर से खुलने से भारत को निश्चित रूप से बड़ी राहत मिलेगी। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद संरचनात्मक समस्याएं जल्द ही दूर हो जाएंगी। ये चिंताएं पश्चिम एशिया में मौजूदा युद्ध से पहले की हैं, जो प्रधानमंत्री मोदी की इजराइल यात्रा के सिर्फ दो दिन बाद शुरू हुआ था।'

रमेश ने दावा किया, 'रुपया एक वर्ष से अधिक समय से काफी दबाव में था और डॉलर की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ता जा रहा था। निजी निवेश की दरें, जो जीडीपी वृद्धि का सबसे महत्वपूर्ण निर्धारक हैं, कई वर्षों से सुस्त रही हैं।'

उनका कहना है कि यह मांग में धीमी वृद्धि का परिणाम है, जो बदले में विभिन्न कारणों से पैदा हुई है।

उन्होंने कहा, 'पिछले एक दशक में वास्तविक मजदूरी में ठहराव है, चीन से आयात की 'डंपिंग' पर रोक लगाने में मोदी सरकार की विफलता के कारण रिकॉर्ड व्यापार घाटा हुआ है और खासकर रोजगार पैदा करने वाले एमएसएमई की वृद्धि खतरे में पड़ी है।'

कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि कर अधिकारियों और जांच एजेंसियों को दी गई अनियंत्रित शक्तियों के कारण कुल मिलाकर निवेश माहौल का खराब हुआ है।

उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान, जिसे नवंबर 2008 में मुंबई में आतंकी हमलों के बाद भारत ने सफलतापूर्वक अलग-थलग कर दिया था, अब लगता है कि उसने नया क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव हासिल कर लिया है। पाकिस्तान के रणनीतिक ढांचे में चीन की गहरी पैठ के कारण यह स्थिति भारत की विदेश नीति के लिए एक गंभीर भू-राजनीतिक चुनौती बन गई है।'

रमेश ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी से यह उम्मीद करना बहुत ज्यादा होगा कि वे इजराइल के प्रति अपनी अंधभक्ति और बिना शर्त समर्थन पर पुनर्विचार करेंगे। लेकिन मानवीय पहलुओं और लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धताओं से अलग, हमारा राष्ट्रीय हित उस संतुलन की मांग करता है, जो प्रधानमंत्री मोदी ने नहीं दिखाया है।'

भाषा हक जितेंद्र मनीषा

मनीषा