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होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से भारत को तेल आपूर्ति जोखिम में मिलेगी राहत

नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने या इसके फिर से खुलने से भारत जैसे दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातक देश को बड़ी राहत मिल सकती है। इससे तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम होंगी, माल ढुलाई लागत घटेगी और महंगाई पर दबाव भी कम होगा।

ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकीर्ण समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति/परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर जैसे प्रमुख खाड़ी उत्पादकों के लिए मुख्य निर्यात मार्ग है जो भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता भी हैं।

फरवरी के अंत में ईरान से जुड़े तनाव शुरू होने के बाद इस जलडमरूमध्य से कच्चे तेल (जिससे पेट्रोल और डीजल बनते हैं) और प्राकृतिक गैस (जिसका उपयोग बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, सीएनजी एवं घरेलू रसोई गैस के रूप में होता है) की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इससे कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग बीमा प्रीमियम और मालभाड़ा दरों में तेज बढ़ोतरी हुई।

उद्योग सूत्रों एवं विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने और तनाव में कमी से वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर हो सकते हैं और भारत जैसे आयातक देशों के लिए स्थिति बेहतर हो सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम समझौते की घोषणा के बाद रविवार को तेल कीमतों में गिरावट आई। इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के ‘‘टोल-फ्री’’ आवागमन की अनुमति दी जाएगी।

ट्रंप ने कहा, ‘‘ मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘टोल-फ्री’ खोलने और साथ ही अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की अनुमति देता हूं। दुनिया के जहाज अपने इंजन शुरू करें। तेल आने दें।’’

शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक तौर पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

इस खबर के बाद ब्रेंट क्रूड करीब चार प्रतिशत टूटकर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

युद्ध के चरम के दौरान कच्चे तेल की कीमतें फरवरी के 70-72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। इससे पेट्रोल-डीजल उत्पादन लागत बढ़ी। हालांकि सरकार ने खुदरा कीमतों में संशोधन को मई के मध्य तक टाल दिया था।

सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क 10 रुपये प्रति लीटर घटाया था, ताकि महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव के दौरान खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी से बचा जा सके।

पश्चिम बंगाल समेत पांच अहम राज्यों में चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई, जबकि सीएनजी छह रुपये प्रति किलोग्राम और एलपीजी 14.2 किलोग्राम सिलेंडर पर 89 रुपये महंगी हुई।

इसके बावजूद, खुदरा कीमतें लागत से कम रहने के कारण सरकारी तेल कंपनियों को अभी भी लगभग 650 करोड़ रुपये प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार, तेल कीमतों में नरमी और जलडमरूमध्य के खुलने से यह नुकसान धीरे-धीरे कम हो सकता है।

उद्योग जगत के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘ सरकारी तेल कंपनियों को एक तिमाही में जितना नुकसान हुआ, वह उनके पूरे साल के मुनाफे के बराबर है। यदि समझौता कायम रहता है, तो ऊर्जा आपूर्ति आसान होगी और कीमतों पर भी दबाव घटेगा।’’

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो भारत के आयात की लागत पर दबाव कम होगा, महंगाई नियंत्रित होगी और व्यापार के लिए अनुकूल माहौल बनेगा।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा