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वाराणसी की दालमंडी में तीन परिसरों पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश

प्रयागराज, 14 जून (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी के नगर आयुक्त और अन्य प्रतिवादी अधिकारियों को वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र में तीन परिसरों के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने और 25 मई के नोटिस के आलोक में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है।

दालमंडी क्षेत्र में ध्वस्तीकरण अभियान का मुख्य उद्देश्य काशी विश्वनाथ मंदिर जाने वाले मार्ग को चौड़ा करना है जिससे मंदिर तक पहुंच सुगम हो सके और आसपास के क्षेत्र में ढांचागत सुविधाएं बढ़ाई जा सकें।

इस अभियान के तहत उन ढांचों को ध्वस्त करना शामिल है जो असुरक्षित या अनधिकृत हैं। साथ ही इस अभियान का लक्ष्य अतिक्रमण की गई भूमि को वापस हासिल करना और आगंतुकों एवं निवासियों के लिए बेहतर मार्ग सुनिश्चित करना है।

अलिमुन निशा, राशिद जफर और जुल करनैन ने तीन अलग-अलग रिट याचिकाएं दायर कर वाराणसी नगर निगम के जोनल अधिकारी द्वारा 25 मई, 2026 को उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 331 के तहत जारी नोटिस को चुनौती दी है।

संबंधित अधिकारियों को अपने जवाब दाखिल करना का निर्देश देते हुए न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई की तिथि 20 जुलाई निर्धारित की।

इस ध्वस्तीकरण अभियान ने स्थानीय निवासियों के बीच विरोध और चिंता पैदा की है। उनकी दलील है कि यह ध्वस्तीकरण अवैध है और इससे उनकी आजीविका और विरासत को खतरा पैदा हुआ है।

वाराणसी जिला प्रशासन ने दालमंडी क्षेत्र में ध्वस्तीकरण के लिए 187 भवनों को चिह्नित किया है। इस परियोजना का लोक निर्माण विभाग और वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा समर्थन किया जा रहा है।

याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, नोटिस पर याचिकाकर्ताओं द्वारा पूर्व में की गई आपत्तियों पर अब तक कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया गया है। इसलिए, उनके परिसरों को ध्वस्त करने का नोटिस अवैध है।

अदालत ने 12 जून के अपने आदेश में कहा, ‘‘प्रतिवादी उक्त परिसरों के संबंध में यथास्थिति बनाए रखेंगे और उन्हें 26 मई के नोटिस के आलोक में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से रोका जाता है।’’

भाषा सं राजेंद्र सुरभि

सुरभि