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कैग ने असम की सामाजिक लेखापरीक्षा इकाई में कमियों की ओर इशारा किया; सुधार के उपाय सुझाए

गुवाहाटी, 14 जून (भाषा) असम में ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए गठित सामाजिक लेखा परीक्षा इकाई (एसएयू) को कामकाज और शासन से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

मार्च 2024 में खत्म हुई अवधि के लिए स्थानीय निकायों पर कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि एसएयू का पंजीकरण काफी पहले ही खत्म हो गया था, क्योंकि शासी निकाय की बैठकें कम होने की वजह से बजट को मंजूरी मिलने और बही खातों के वार्षिक सत्यापन की प्रक्रिया में रुकावट आई।

रिपोर्ट में कहा गया है, “सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम के तहत एसएयू का पंजीकरण दिसंबर 2019 से लगभग पांच साल तक अमान्य रहा। शासी निकाय की बैठकें न हो पाना सरकारी स्तर पर निगरानी में कमी को दिखाता है।”

रिपोर्ट में कैग ने सुझाव दिया है कि एसएयू के बजट को मंजूरी देने, बहीखातों के वार्षिक सत्यापन और गतिविधियों की असरदार निगरानी सुनिश्चित करने के लिए शासी निकाय की बैठकें निर्धारित अंतराल पर होनी चाहिए।

रिपोर्ट में इस बात को भी रेखांकित किया गया है कि एसएयू की जनशक्ति नीति को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है, जबकि अगस्त 2017 में ही इसका प्रस्ताव रखा गया था और वित्त विभाग ने इसकी समीक्षा भी की थी।

इसमें कहा गया है, “एसएयू में कर्मचारियों की भारी कमी (कुल 43 फीसदी पद खाली) है, खासकर मुख्य फील्ड कर्मचारियों के मामले में, जिससे सामाजिक लेखा परीक्षा के लक्ष्यों को पूरा करने और समय पर ऑडिट करने की उसकी क्षमता पर असर पड़ता है।”

कैग ने सुझाव दिया कि जनशक्ति नीति को अंतिम रूप दिया जाए और जरूरी संख्या में कर्मचारियों की भर्ती के लिए कदम उठाए जाएं।

कैग के मुताबिक, आचार संहिता भी लागू नहीं की गई है, जबकि सामाजिक लेखा परीक्षा के लेखा परीक्षा मानकों के तहत ऐसा करना जरूरी है। उसने कहा कि एसएयू को सामाजिक लेखा परीक्षा कर्मचारियों के लिए आचार संहिता तैयार करनी चाहिए और उसे लागू करना चाहिए।

भाषा पारुल दिलीप

दिलीप