... हिमांक नेगी ...
नयी दिल्ली, दो जून (भाषा) म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप में विश्व रिकॉर्ड के साथ इतिहास रचने वाली भारतीय पिस्टल निशानेबाज ईशा सिंह ने कहा कि पेरिस ओलंपिक और उसके बाद उनके प्रदर्शन में आई गिरावट ने उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। इस 21 वर्षीय निशानेबाज ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में 43 अंकों का विश्व रिकॉर्ड स्कोर बनाकर स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में रजत पदक भी अपने नाम किया। ईशा के इन दो पदकों ने भारत को पदक तालिका में शीर्ष स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनको देश की अग्रणी निशानेबाजों में और मजबूती से स्थापित कर दिया। ईशा ने पीटीआई से कहा, “स्वाभाविक रूप से मुझ पर काफी दबाव था क्योंकि आखिरी शॉट तक यह पता नहीं चलता कि परिणाम क्या होगा। मैं कह सकती हूं कि मैंने अंतिम क्षण तक संघर्ष किया। उस दिन मेरा लक्ष्य केवल अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना था और मेरे मन में बस यही चल रहा था।” महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल में इतिहास रचने के बाद वह 10 मीटर एयर पिस्टल फाइनल में 241.2 अंक हासिल कर दूसरे स्थान पर रहीं। इस स्पर्धा में भारत की सुरुचि इंदर सिंह ने 242.1 अंक बनाकर स्वर्ण पदक जीता। ईशा ने दबाव झेलने की अपनी क्षमता के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इसके पीछे कोई विशेष रहस्य नहीं है। उन्होंने कहा, “इसमें कोई राज नहीं है। मैं पिछले 10 वर्षों से खेल रही हूं। यह सिर्फ अनुभव का परिणाम है। आपको अपनी भावनाओं को स्वीकार करना होता है और यह समझना होता है कि वे खत्म नहीं होंगी। भावनाओं से मेरा मतलब दबाव से है।” उन्होंने कहा, “ आप अगर एक छात्र हैं और परीक्षा दे रहे हैं, तब भी आप दबाव महसूस करेंगे। लेकिन आपको खुद को याद दिलाना होगा कि प्रक्रिया वही रहती है। दिन के अंत में आपको वही काम करना है। बदलता सिर्फ खिताब, प्रतियोगिता और प्रतिद्वंद्वियों के नाम हैं।” ईशा की यह सोच केवल अनुभव से नहीं, बल्कि निराशा से भी उपजी है। उन्होंने कहा, “ओलंपिक ने मेरे व्यक्तित्व में आए बदलाव में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। खासकर तब, जब आप जीत नहीं पाते। वह दौर सुखद नहीं होता। आप कई तरह की भावनाओं से गुजरते हैं और हर छोटी-बड़ी बात पर विचार करने लगते हैं।” उन्होंने कहा, “मैं उस अनुभव के लिए आभारी हूं। भले ही वह अच्छा अनुभव नहीं था, मैंने उसे स्वीकार किया और मुझे लगता है कि उसने मुझे मानसिक रूप से कहीं अधिक मजबूत बना दिया।” ईशा ने कहा, “आपको खुद को याद दिलाना चाहिए कि आप कोई रोबोट नहीं हैं। हर बार अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना संभव नहीं है। यह याद रखना जरूरी है कि आपका प्रयास महत्वपूर्ण है। अगर कभी सफलता नहीं मिलती, तो यह भी स्वीकार करना चाहिए कि ऐसा होना स्वाभाविक है।” ईशा की यह सफलता ऐसे समय आई है, जब भारतीय महिला पिस्टल निशानेबाजी विश्व स्तर पर लगातार मजबूती दिखा रही है। ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर, म्यूनिख स्वर्ण पदक विजेता सुरुचि इंदर सिंह और अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज रिदम सांगवान के साथ वह उस मजबूत समूह का हिस्सा हैं, जो लगातार वैश्विक स्तर पर भारत के लिए पदकों की चुनौती पेश कर रहा है। भाषा आनन्द नमितानमिता