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दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर विस्फोट के बाद इमारत ढही, बाल-बाल बचे मजदूर

(मानसी जगानी)

नयी दिल्ली, दो जून (भाषा) उत्तरी दिल्ली के मुकुंदपुर में एलपीजी सिलेंडर के शक्तिशाली विस्फोट के कारण एक व्यावसायिक इमारत के जमींदोज होने से कुछ ही क्षण पहले, संजीव ने अंदर चटाई बिछाई थी और थोड़ा आराम करने की तैयारी कर रहे थे।

उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले संजीव सुबह मंदिर दर्शन करके लौटे थे और लंबी कतार में खड़े रहने के कारण काफी थक गए थे।

घायल कर्मचारी श्याम सिंह के बचपन के दोस्त संजीव ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, 'मैं मंदिर से लौटा था और बहुत थका हुआ था। मैंने सोचा कि कुछ मिनट के लिए लेट जाऊं।'

लेकिन पांच मिनट बाद ही वह पानी पीने के लिए बाहर निकल गए।

उन्होंने बताया, 'तभी मुझे एक जोरदार धमाका सुनाई दिया। ऐसा लगा जैसे कोई टायर फटा हो। पल भर में सब कुछ खत्म हो गया। पूरी इमारत ढह गई। अगर मैं पानी पीने बाहर नहीं गया होता, तो मैं भी मर जाता।'

मुकुंदपुर में सोमवार सुबह एक एलपीजी सिलेंडर विस्फोट के बाद यह एक मंजिला इमारत ढह गई, जिससे एक महिला गंभीर रूप से झुलस गई और कई अन्य लोग मलबे के नीचे दब गए।

श्रमिकों और स्थानीय लोगों ने बताया कि इस इमारत में विनिर्माण और पैकेजिंग की छोटी इकाइयां संचालित हो रही थीं। इसके एक हिस्से में बर्तनों पर पेंट करके उन्हें भट्टी में पकाया जाता था, जबकि दूसरी इकाई चार्जर और पंखे के कलपुर्जों की पैकेजिंग में लगी थी।

पटना के पास एक गांव के रहने वाले मजदूर मुन्ना ने बताया, 'वहां एक भट्टी थी जहां पेंट किए गए बर्तनों को पकाया जाता था। पास ही गैस सिलेंडर भरे जा रहे थे। उनमें से एक सिलेंडर से गैस लीक हो रही थी।'

बाहरी-उत्तरी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) हरेश्वर स्वामी ने बताया कि पुलिस को सुबह करीब 9:30 बजे विस्फोट और इमारत ढहने की सूचना मिली थी। इसके तुरंत बाद पास में गश्त कर रहे आपातकालीन प्रतिक्रिया वाहन (ईआरवी) और स्थानीय पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे।

स्वामी ने कहा, '11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। एक महिला झुलस गई है और उसकी हालत गंभीर है। उसे सफदरजंग अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है।'

दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के अधिकारियों के अनुसार, इमारत के भूतल का इस्तेमाल कथित तौर पर वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों से छोटे एलपीजी सिलेंडरों में गैस पुनर्भरण के लिए किया जा रहा था। इसी दौरान यह विस्फोट हुआ, जिससे पूरी संरचना ढह गई।

अधिकारियों ने बताया कि यह विस्फोट 250 वर्ग गज के एक मंजिला मकान में हुआ।

मजदूरों ने बताया कि काम शुरू होने से पहले वे एक कमरे में इकट्ठा हुए थे जहां चाय बन रही थी। उन्होंने बताया कि जो महिला इस हादसे में गंभीर रूप से झुलसी है, वह हर सुबह मजदूरों के लिए चाय बनाती थी।

एक मजदूर ने कहा, 'सुबह-सुबह आमतौर पर भट्टी नहीं चलती है। हमेशा की तरह सभी मजदूरों के लिए चाय तैयार की जा रही थी।'

उसने बताया कि इन इकाइयों में काम करने वाले कई मजदूर मुकुंदपुर की पास की गलियों में रहते हैं और रोजगार की तलाश में बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से दिल्ली आए हैं।

पीड़ितों के एक पड़ोसी ने आरोप लगाया, 'वहां गैस की गंध आ रही थी। लोगों को पता था कि गैस रिसाव हो रहा है, लेकिन वे सिलेंडर की पहचान नहीं कर सके। जैसे ही महिला ने चाय बनाने के लिए गैस चूल्हा जलाया, जोरदार धमाका हो गया।'

उन्होंने यह भी दावा किया कि इमारत में कमर्शियल सिलेंडर जमा करके रखे गए थे और इसे लेकर पड़ोसियों और काम संचालित करने वालों के बीच विवाद भी हुआ था। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

संजीव ने बताया कि यह इमारत 15 साल से अधिक पुरानी थी। इसके भूतल पर एक बड़ा हॉल जैसा क्षेत्र था, जबकि ऊपरी मंजिल पर तीन से चार कमरे बने हुए थे। विस्फोट के दौरान शटर बाहर की तरफ उड़ गए थे।

इस हादसे में बिहार के रहने वाले मुकेश के हाथ-पैर गंभीर रूप से झुलस गए। पड़ोसियों के मुताबिक, विस्फोट से कुछ पल पहले वह फोन पर किसी दोस्त से बात कर रहा था।

उसके एक रिश्तेदार ने बताया, 'जैसे ही उसने इमारत में प्रवेश किया, एक जोरदार आवाज हुई और दरवाजे का एक हिस्सा उसके चेहरे पर आ गिरा, जिससे उसका जबड़ा गंभीर रूप से घायल हो गया।'

पीड़ितों के परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि रास्ते की दिक्कतों के कारण बचाव अभियान में बाधा आई।

संजीव ने कहा, 'एम्बुलेंस तंग गली में प्रवेश नहीं कर सकी। उसे आने में करीब एक घंटा लगा। मेरा दोस्त श्याम किसी तरह लगभग 100 मीटर पैदल चलकर एम्बुलेंस तक पहुंचा। विस्फोट का झटका उसे बुरी तरह लगा था, लेकिन गनीमत रही कि उसकी आंखें बच गईं।'

यह घटना साकेत मेट्रो स्टेशन के पास 30 मई की शाम को हुई उस त्रासदी के कुछ ही दिनों बाद हुई है, जब एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत ढहने से छह लोगों की मौत हो गई थी और आठ अन्य घायल हो गए थे।

भाषा सुमित माधव

माधव