नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) के नए आंकड़ों से भारत में बाल एवं मातृ स्वास्थ्य, पोषण और टीकाकरण संकेतकों में महत्वपूर्ण सुधार का संकेत मिला है। बाल अधिकार संगठन ‘क्राइ’ ने रविवार को यह जानकारी दी।
‘चाइल्ड राइट्स एंड यू’ (क्राइ) ने इन निष्कर्षों का स्वागत करते हुए कहा कि एनएफएचएस-5 (2019-21) की तुलना में, नवीनतम आंकड़ा उल्लेखनीय सुधारों को दर्शाता है जो निरंतर सार्वजनिक स्वास्थ्य निवेश, सेवा मुहैया कराने वाली मजबूत प्रणालियों और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों के प्रयासों के प्रभाव को रेखांकित करता है।
‘क्राइ’ ने एक बयान में कहा, ‘‘हाल में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण रिपोर्ट - छठे दौर (एनएफएचएस-6, 2023-24) के निष्कर्ष भारत में बाल एवं मातृ स्वास्थ्य, पोषण और टीकाकरण की स्थिति से संबंधित कई प्रमुख संकेतकों में उत्साहजनक प्रगति दर्शाते हैं।’’
सर्वेक्षण के अनुसार, टीकाकरण कवरेज में सबसे उल्लेखनीय प्रगति हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक 12-23 महीने की आयु के जिन बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हुआ है, उनका अनुपात एनएफएचएस-5 में 83.8 प्रतिशत से बढ़कर एनएफएचएस-6 में 87.1 प्रतिशत हो गया है, जबकि कम से कम एक टीके का कवरेज 96 प्रतिशत से ऊपर बना रहा।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि रोटावायरस टीकाकरण कवरेज दोगुने से अधिक बढ़कर 36.4 प्रतिशत से 85.6 प्रतिशत हो गया है और खसरा टीके की दूसरी खुराक का कवरेज 58.6 प्रतिशत से बढ़कर 71.8 प्रतिशत हो गया है।
एनएफएचएस-6 के आंकड़ों से बाल पोषण में सकारात्मक रुझान भी सामने आए हैं।
इन आंकड़ों में कहा गया है, ‘‘पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में बौनापन 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत हो गया है, जबकि गंभीर कुपोषण 7.7 प्रतिशत से घटकर 5.2 प्रतिशत हो गया है। कम वजन वाले बच्चों की संख्या में मामूली गिरावट (32.1 प्रतिशत से 31.8 प्रतिशत तक) दर्ज की गई है। कुल मिलाकर रुझान कुपोषण से निपटने में धीरे-धीरे प्रगति का संकेत देता है।’’
‘क्राइ’ की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पूजा मारवाह ने कहा कि उत्साहजनक रुझान निरंतर नीतिगत ध्यान, लक्षित योजनाओं और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों के प्रयासों के माध्यम से भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के धीरे-धीरे मजबूत होने को दर्शाते हैं।
भाषा आशीष सिम्मी
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