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मुरुगन ने चोल काल के ताम्रपत्र वापस लाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की सराहना की

चेन्नई, 31 मई (भाषा) केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने रविवार को घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हाल में नीदरलैंड से वापस लाया गया चोलकालीन ताम्रपत्र अभिलेख (सेप्पु पट्टयम) जल्द ही तमिलनाडु में उसके मूल स्थान पर ले जाया जाएगा।

मुरुगन ने प्रधानमंत्री मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 134वें एपिसोड को सुनने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि इस ऐतिहासिक धरोहर की वापसी भारत की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्स्थापित और संरक्षित करने के केंद्र सरकार के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘हाल में पांच देशों की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीदरलैंड से चोल काल के ताम्रपत्र अभिलेख वापस लेकर आए। इन ऐतिहासिक ताम्रपत्रों को जल्द ही तमिलनाडु में उनके उचित स्थान पर लौटाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।’’

सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री ने तमिलनाडु के लोगों की ओर से प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया और कहा कि केंद्र सरकार विदेशों में तस्करी करके ले जाई गई 600 से अधिक प्राचीन मूर्तियों को पहले ही वापस लाने में सफल रही है, जिनमें से अनेक को राज्य के मंदिरों में पुनः स्थापित किया जा चुका है।

मुरुगन ने चोल वंश की विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए मोदी के प्रयासों की भी सराहना की।

उन्होंने कहा, ‘‘चोलों का इतिहास गौरवशाली रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले गंगईकोंडा चोलापुरम गए थे, जहां उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित करके यह रेखांकित किया था कि कैसे चोलों ने समुद्र पार तक अपना प्रभाव विस्तारित किया। उन्होंने एक बार फिर उनकी समृद्ध विरासत की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है।’’

भाजपा नेता ने ‘मन की बात’ के ताजा एपिसोड का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु की प्रसिद्ध सलेम और मालगोवा आम की किस्मों का उल्लेख किया तथा स्कूली छात्रों की परोपकारी पहलों की सराहना की।

मुरुगन ने कहा, ‘‘उन्होंने विशेष रूप से नागरकोइल के जयगोपाल गरोड़िया स्कूल के छात्रों और उनकी मार्गदर्शक गिरिजा अम्मा की प्रशंसा की। प्रतिदिन केवल एक रुपये की बचत करके छात्रों ने सैनिकों के कल्याण के लिए 40 लाख रुपये जुटाने में सफलता हासिल की।’’

उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ देशभर के आम नागरिकों के अपेक्षाकृत अनदेखे, लेकिन महत्वपूर्ण योगदान को पहचान देने और सम्मान करने वाले मंच के रूप में विकसित हो गया है।

भाषा अमित सुरेश

सुरेश