कोच्चि, 17 अप्रैल (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने निजी अस्पतालों के प्रबंधन को हड़ताल पर बैठी नर्सों के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की शुक्रवार को अनुमति दे दी।
अदालत का यह फैसला दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता के प्रयास विफल होने के बाद आया।
न्यायमूर्ति हरिशंकर वी मेनन ने कहा कि चूंकि निजी अस्पतालों के प्रबंधन को अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की अनुमति दी जा रही है, इसलिए नर्सों को भी अपनी हड़ताल जारी रखने का अधिकार है।
उच्च न्यायालय ने 13 मार्च को दोनों पक्षों को मध्यस्थता के जरिये राज्यव्यापी वेतन विवाद सुलझाने का निर्देश दिया था।
अदालत ने कहा, “दोनों पक्ष ऐसा कोई भी काम करने से परहेज करेंगे, जिससे उनके बीच मौजूद मतभेद बढ़ जाएं या कायम रहें।”
शुक्रवार को उच्च न्यायालय को सूचित किया गया कि नर्स एसोसिएशन के सदस्यों की कम से कम दो अस्पतालों में हड़ताल जारी है।
न्यायमूर्ति मेनन ने कहा, “यह अदालत इस बात का भी संज्ञान लेती है कि दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता का प्रयास किया गया था, लेकिन वह विफल रहा। इसलिए मेरी राय में प्रथम दृष्टया इन रिट याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं (निजी अस्पतालों के प्रबंधन) की ओर से दी गई यह दलील उचित है कि उन्हें हड़ताली नर्सों के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करके कानून के अनुसार आगे बढ़ने की अनुमति दी जाए।”
यूनाइटेड नर्सेज एसोसिएशन (यूएनए) से संबद्ध नर्सों ने निजी अस्पतालों में मूल वेतन को बढ़ाकर 40,000 रुपये प्रति माह करने की मांग को लेकर केरल में 11 मार्च को अनिश्चितकालीन राज्यव्यापी हड़ताल शुरू की थी। मांगों को मानने से इनकार करने वाले कई निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं हड़ताल की वजह से प्रभावित हुई हैं।
भाषा पारुल दिलीप
दिलीप