नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 2029 के संसदीय चुनावों से महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के निचले सदन से पारित नहीं होने को शुक्रवार को ‘पीड़ादायक’ और महिलाओं के अधिकारों के साथ सीधा अन्याय बताया।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, गुप्ता ने कहा कि महिला मुख्यमंत्री होने के नाते यह विषय उनके लिए केवल राजनीति का नहीं, बल्कि संवेदना और सम्मान का विषय है।
उन्होंने कहा कि देश की करोड़ों महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी देने का यह अवसर आज उनसे छीन लिया गया है।
गुप्ता ने कहा, “आज लोकसभा में जो हुआ, वह हर उस महिला के लिए पीड़ादायक और निराशाजनक है, जो अपने अधिकार और सम्मान की उम्मीद रखती है।”
उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा इस महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक को पारित न होने देना महिलाओं के अधिकारों के साथ सीधा अन्याय है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, “यह पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिलाओं के अधिकारों के रास्ते में बाधा डाली है। उनकी यह सोच महिलाओं के सशक्तीकरण के प्रति उनकी वास्तविक नीयत को दर्शाती है।”
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के संसदीय चुनावों से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया।
सदन में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।
भाषा नोमान नोमान दिलीप
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